NDTV Ground Report: असम चुनाव में 'जस्टिस फॉर जुबीन' का मुद्दा कितना बड़ा? साजिश या हादसा... लोगों को जांच पर कितना भरोसा

जुबीन की मौत की तरह ही चुनाव पर इसके असर को लेकर भी रहस्य बना हुआ है. पूरे असम में कदम-कदम पर ज़ुबीन की तस्वीर लगी दिखती है लेकिन चुनाव के माहौल या मुद्दों को लेकर पूछने पर ज्यादातर वोटर जुबीन की जिक्र नहीं करते. हालांकि कुछ युवाओं ने ज़रूर कहा कि इसको लेकर राज्य सरकार से उनकी नाराज़गी है.

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असम सिंगर जुबीन गर्ग.
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  • असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की मौत के छह महीने बाद भी लोग उनके लिए न्याय की मांग कर रहे हैं.
  • कांग्रेस ने सरकार बनने पर सौ दिनों में जुबीन को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है.
  • मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जुबीन के मामले को अदालत का विषय बताया और राजनीति में घसीटने का विरोध किया.
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दिसपुर:

Zubeen Garg in Assam Election: असमिया गायक जुबीन गर्ग की मौत को 6 महीने हो चुके हैं, लेकिन वो असम के आम लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं. असम में आप जहां भी जाएं जुबिन की तस्वीर नज़र आएगी, उनका गीत सुनाई देगा. चुनावों का वक्त है लेकिन हर तरफ़ जुबीन की तस्वीर नज़र आती है. पिछले साल सितंबर में सिंगापुर में रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई जुबीन की मौत हुई थी. गुवाहाटी से सटे कमरकूची में जहां जुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार हुआ, वहां रोजाना सैकड़ों लोग श्रद्धांजलि देने आते हैं. असम के लोगों को संदेह है जुबीन के ख़िलाफ़ साज़िश रची गई. यही वजह है लोग अपने-अपने तरीक़े से जुबीन को न्याय दिलाने के लिए “जस्टिस फॉर जुबीन” का अभियान चला रहे हैं. “जस्टिस फॉर जुबीन” का जिक्र चुनावों में भी हो रहा है. 

कांग्रेस ने 100 दिनों में जुबीन को न्याय दिलाने का वादा किया

कांग्रेस ने ऐलान किया है कि सरकार बनने पर सौ दिनों में जुबीन को न्याय दिलाएगी. इस पर असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि जुबीन को राजनीति में घसीटना गुनाह है, जिसके लिए कांग्रेस को प्रायश्चित करना पड़ेगा. दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई याद दिला रहे हैं कि सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि चुनाव से पहले जुबीन को न्याय नहीं मिला तो लोग बीजेपी को वोट ना दें! 

एनडीटीवी से बात करते हुए जुबीन गर्ग को न्याय के सवाल पर हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने अपना काम कर दिया है, मामला अदालत में है और अदालत को कोई डेडलाइन नहीं दे सकता.

जुबीन की मौत का चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?

जुबीन की मौत की तरह ही चुनाव पर इसके असर को लेकर भी रहस्य बना हुआ है. पूरे असम में कदम-कदम पर ज़ुबीन की तस्वीर लगी दिखती है लेकिन चुनाव के माहौल या मुद्दों को लेकर पूछने पर ज्यादातर वोटर जुबीन की जिक्र नहीं करते. हालांकि कुछ युवाओं ने ज़रूर कहा कि इसको लेकर राज्य सरकार से उनकी नाराज़गी है. 

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क़यास लगाए जा रहे थे कि ज़ुबीन को लेकर कोई अंडर करंट हुआ तो बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. लेकिन फ़िलहाल ऐसा नज़र नहीं आता. लोग चुनाव से जुड़े बुनियादी मुद्दे यानी विकास, मंहगाई आदि की बात कर रहे हैं. 

जोरहाट में जुबीन के पुराने दोस्तों ने क्या कहा?

जुबीन मूल रूप से ऊपरी असम के जोरहाट से थे. यहीं उनका बचपन गुजरा और फिर उन्होंने गायकी की शुरुआत की. हमनें जोरहाट में उनके पुराने दोस्तों से उनकी भावनाएं समझाने की कोशिश की कि आख़िर जस्टिस फॉर ज़ुबीन का उनके लिए क्या मतलब है? यह भी पूछा कि क्या जुबीन की मौत कोई चुनावी मुद्दा है? 

अपने दोस्त को याद करते हुए मानस ज्योति बोरा कहते हैं कि ज़ुबीन को असम और प्रकृति से बेहद प्यार था. वो किसी महापुरुष या भगवान जैसे थे. वो खुद न्याय करेंगे. वैसे हमें कोर्ट पर भरोसा है. 

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जुबीन के सहयोगियों पर सवाल उठना लाजिमी

जुबीन के एक अन्य दोस्त अमीनुल राशिद ने कहा कि जुबीन के आखिरी पलों का वीडियो देख कर तो हादसा ही लगता है, लेकिन उनके सहयोगियों पर सवाल उठना लाज़िमी है. अगर मैं उनके साथ होता तो लोग मेरे से भी सवाल पूछते. लापरवाही भी हो सकती है. हमें जाँच पर भरोसा करना होगा. 

ये दोनों कॉलेज के दिनों से ज़ुबीन के दोस्त हैं और उन्ही की तरह संगीत से जुड़े हैं. ये मानते हैं कि जुबीन को लेकर हो रही राजनीति सही नहीं है. उन्होंने कहा कि ये चुनाव का मुद्दा नहीं है. ज़ुबीन को न्याय मिलने का हम सब इंतज़ार कर रहे हैं. 

राज्य सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट को किया गठन

हाल में ही जुबीन मामले की जल्द सुनवाई के लिए राज्य सरकार ने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया. तो वहीं सिंगापुर पुलिस की जांच के बाद वहां के शव परीक्षक ने भी किसी साज़िश से इनकार करते हुए हादसे को मौत की वजह बताया है. दूसरी तरफ असम में राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी ज़ुबीन की “हत्या” की जांच में जुटी है. इस मामले की और इस आरोप में जुबीन से जुड़े सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है. 

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बहरहाल राजनीतिक दल इस बात का ख्याल भी रख रहे हैं कि इस भावनात्मक मुद्दे पर वो “राजनीति” करते नज़र ना आएं. लेकिन किसी चुनाव या राजनीति से परे पूरा असम ज़ुबिन को न्याय मिलने का इंतज़ार कर रहा है.

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