85 साल की बुजुर्ग महिला के साथ 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 1.34 करोड़ की ठगी

दिल्ली में साइबर ठगों ने 85 वर्षीय महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक महीने तक मानसिक प्रताड़ना दी और 1.34 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए. ठगों ने आधार‑PAN लेकर रकम विभिन्न बैंक खातों में भेजी. शिकायत पर स्पेशल सेल ने धोखाधड़ी, प्रतिरूपण, जबरन वसूली और साजिश की धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

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  • दिल्ली में 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1.34 करोड़ रुपये की ठगी हुई है.
  • ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी और वकील बताकर बुजुर्ग महिला को लगभग एक महीने तक मानसिक प्रताड़ित किया.
  • महिला ने डर के कारण चार-बार बैंक जाकर तीन खातों से चेक के माध्यम से रकम ठगों के खातों में ट्रांसफर की.
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राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला से करीब 1.34 करोड़ रुपये की ठगी का है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस संबंध में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. शिकायतकर्ता मोनिका मनचंदा ने बताया कि उनकी मां कंवल मनचंदा को 6 नवंबर 2025 से व्हाट्सएप पर अज्ञात नंबरों से कॉल आने लगे. कॉल करने वालों ने खुद को दरियागंज थाने का पुलिस अधिकारी और वकील बताकर महिला को डराना शुरू कर दिया.

'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर एक महीने तक मानसिक प्रताड़ना

ठगों ने बुजुर्ग महिला को धमकी दी कि वे 'डिजिटल अरेस्ट' के दायरे में हैं. यह मानसिक प्रताड़ना लगभग एक महीने तक यानी 7 दिसंबर 2025 तक चलती रही. इस दौरान लगातार उनसे पैसों की मांग की गई, और भय के माहौल में महिला चार बार बैंक ऑफ महाराष्ट्र पहुंचीं.

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वहां से उन्होंने अपने तीन अलग-अलग बैंक खातों से चेक के माध्यम से कुल 1,34,00,000 रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए. ठगों ने आधार और PAN तक हासिल कर लिए. ठगी के दौरान अपराधियों ने पीड़िता का आधार कार्ड और PAN कार्ड की जानकारी भी निकलवा ली. पुलिस जांच में सामने आया कि रकम को कई बैंकों के खातों में भेजा गया:

  • एक्सिस बैंक: 1.20 करोड़ रुपये
  • इंडसइंड बैंक: 8 लाख रुपये
  • SBI: 5 लाख रुपये
  • फेडरल बैंक: 1.93 लाख रुपये

FIR दर्ज, ठगों की तलाश जारी

पीड़िता की बेटी की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 25 दिसंबर 2025 को मामला दर्ज किया. FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) धोखाधड़ी, 319 प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी, 308 जबरन वसूली, 61(2) आपराधिक साजिश के तहत दर्ज की गई है.

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पुलिस अब उन व्हाट्सएप नंबरों, बैंक खातों और अन्य डिजिटल ट्रेल्स की जांच कर रही है, जिनके माध्यम से इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी को अंजाम दिया गया.

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