- बंगाल चुनाव से पहले 50 से अधिक अधिकारियों के तबादलों को CM ममता बनर्जी ने राजनीतिक हस्तक्षेप बताया.
- ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्रवाई को संस्थागत राजनीतिकरण और संविधान की भावना के खिलाफ करार दिया है.
- आयोग ने मुख्य सचिव नंदिनी, गृह सचिव जगदीश मीणा, डीजीपी पीयूष पांडे, पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार को हटाया है.
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के लगातार तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया जाना “सबसे बड़े स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप” है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
चुनाव आयोग की कार्रवाई पर हमला जारी रखते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसले संस्थाओं के “सुनियोजित राजनीतिकरण” का हिस्सा हैं और यह सीधे-सीधे संविधान की भावना पर चोट है. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय इस तरह बड़े पैमाने पर तबादले करना प्रशासनिक स्थिरता को कमजोर करने की कोशिश है.
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद Election Commission of India ने राज्य में कई वरिष्ठ अधिकारियों का फेरबदल किया है. इनमें मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती का तबादला, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को हटाना, साथ ही डीजीपी पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार को पद से हटाने जैसे फैसले शामिल हैं.
इसके अलावा चुनाव आयोग ने हाल ही में एक और बड़े प्रशासनिक फेरबदल का आदेश दिया, जिसमें दो सचिव स्तर के अधिकारियों को दूसरे चुनावी राज्यों में पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया, जबकि 13 आईएएस और 5 आईपीएस अधिकारियों को चुनाव प्रबंधन से जुड़े अहम पदों पर तैनात किया गया है.
ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार से बिना पर्याप्त चर्चा के इस तरह लगातार फैसले लेना संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के दबाव में चुनाव आयोग काम कर रहा है, जिससे निष्पक्ष चुनाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
राज्य में चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ प्रशासनिक फेरबदल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और इसे लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.
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