सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की रेप पीड़िता के 31 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने के मामले में एम्स का आदेश ठुकराया. अदालत ने कहा कि नागरिकों के फैसलों का सम्मान होना चाहिए और केंद्र को गर्भपात कानून में बदलाव करना चाहिए. SC ने नाबालिग को उसकी इच्छा के बिना गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर करना जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन बताया.