World Autism Awareness Day: किन बच्चों को होता है ऑटिज्म का सबसे ज्यादा रिस्क? जानें इस साल की थीम

World Autism Awareness Day: विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस हर साल 2 अप्रैल को मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य ऑटिज्म के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.

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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस प्रत्येक साल 2 अप्रैल को मनाया जाता है.

World Autism Awareness Day 2025: हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (World Autism Awareness Day) के रूप में मनाया जाता है ताकि ऑटिज्म के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके और समाज में इसकी स्वीकार्यता बढ़े. ताकि बढ़ी हुई जागरूकता के साथ बच्चों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का सही और जल्दी निदान किया जा रहा है. आइए ऐसे में जानते हैं ऑटिज्म क्या है और इससे क्या खतरा है.

क्या होता है ऑटिज्म? (What Is Autism)

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर ब्रेन ग्रोथ से संबंधित होता है. जो बच्चे ऑटिज्म से प्रभावित होते हैं, उन्हें सामाजिक व्यवहार में और अन्य लोगों से बातचीत करने में मुश्किलें होती हैं. सरल भाषा में कहें तो इस डिसऑर्डर में बच्चे को कम्यूनिकेट करने में लैग्वेंज डेवलप करने में या सोशली इंटरेक्ट करने में परेशानी आती है. ये बच्चे न तो किसी से अपनी बात ठीक से कह पाते हैं और न ही दूसरों की बात ठीक से समझ पाते हैं. ऐसे बच्चे खुद में ही रहना पसंद करते हैं और बार- बार एक ही एक्टिविटी को दोहराते हैं.

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ऑटिज्म जागरूकता दिवस की थीम (Autism Awareness Day Theme)

इस साल 2025, विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस का विषय है  "Advancing Neurodiversity and the UN Sustainable Development Goals (SDGs)" है. यह विषय संयुक्त राष्ट्र द्वारा  तय किया गया है. जिसका उद्देश्य न्यूरो डायवर्सिटी को स्वीकार करने और बढ़ावा देने के महत्व पर ध्यान केंद्रित करना है.

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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस का इतिहास (World Autism Awareness Day History)

18 दिसंबर 2007 को आयोजित 76वीं पूर्ण बैठक में संयुक्त राष्ट्र ने 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाने का फैसला लिया गया था, जिसके बाद से  विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2 अप्रैल को हर साल मनाया जाने लगा.  बता दें, दुनिया भर में ऑटिस्टिक व्यक्तियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कदम उठाया गया था.

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ऑटिज्म के रिस्क फैक्टर (Risk Factors of Autism)

- ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) होने का एक कारण जेनेटिक हो सकता है, जो परिवारों से बच्चों तक आ सकता है. कई स्टडी में पाया गया है कि, जुड़वां बच्चों में, यदि एक बच्चे को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) है, तो दूसरे बच्चे को भी ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD)  होने की 36-95% संभावना होगी.

- ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) से पीड़ित बच्चों के भाई-बहनों में भी यह डिसऑर्डर होने का जोखिम 2% से 8%  तक होता है.

- अगर माता-पिता में किसी मनोरोग संबंधी विकारों (Psychiatric Disorders) से जूझ रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में बच्चों में  ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD)  होने का खतरा हो सकता है.

- जिन बच्चों का जन्म समय से पहले यानी 2500 ग्राम में हो जाता है, तो ऑटिज्म का खतरा 2 गुना बढ़ जाता है.

- क्लोरपाइरीफोस (chlorpyrifos) जैसे कीटनाशकों के संपर्क में आने से भ्रूण में ऑटिज्म का खतरा बढ़ जाता है.

- गर्भवती महिलाएं जिनका पहला और दूसरा ट्राइमेस्टर चल रहा है, वह अगर इस दौरान वायरल या जीवाणु संक्रमण के संपर्क में आती है, तो इससे, उनके बच्चों में ऑटिज्म सहित न्यूरोसाइकाइट्रिक रोगों का खतरा 13% तक बढ़ जाता है.
 

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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