थकान, बढ़ता वजन और चेहरे पर बाल? कहीं आप भी तो नहीं हैं PCOS की शिकार?

आज भारतीय महिलाएं PCOS को सिर्फ पीरियड्स या प्रेग्नेंसी की समस्या नहीं, बल्कि एक पूरी लाइफस्टाइल कंडीशन के रूप में समझ रही हैं. गोलियों से आगे बढ़कर, अपने शरीर को सुनना और समझना ही असली बदलाव की शुरुआत है.

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PCOS treatment without pills : PCOS का मतलब दवाओं को पूरी तरह नकारना नहीं है.

What Is PCOS : थकान, अनियमित पीरियड्स, अचानक वजन बढ़ना, मुंहासे या बालों का झड़ना अक्सर महिलाएं इन लक्षणों को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देती हैं. लेकिन कई मामलों में ये संकेत PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) जैसे हार्मोनल डिसऑर्डर की ओर इशारा करते हैं. आज PCOS भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में महिलाओं की सेहत से जुड़ा एक गंभीर लेकिन कम समझा गया हेल्थ इश्यू बन चुका है. खास बात यह है कि यह समस्या सिर्फ पीरियड्स या प्रेग्नेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि मेटाबॉलिज्म, मेंटल हेल्थ और लंबे समय तक रहने वाली बीमारियों के खतरे से भी जुड़ी हुई है. बावजूद इसके, बड़ी संख्या में महिलाएं आज भी सही जानकारी, समय पर इलाज और बैलेंस ट्रीटमेंट से दूर हैं.

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PCOS क्या है? What Is PCOS

PCOS एक हार्मोनल कंडीशन है जिसमें पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, मुंहासे, चेहरे पर अनचाहे बाल, बाल झड़ना, वजन बढ़ना और फर्टिलिटी से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. रिसर्च के मुताबिक, PCOS दुनिया की करीब 10% महिलाओं को प्रभावित करता है, जबकि भारत में यह आंकड़ा और ज़्यादा करीब हर 4 में से 1 महिला माना जाता है. हैरानी की बात यह है कि लगभग 70% महिलाओं को पता ही नहीं चलता कि उन्हें PCOS है.

दवाइयों के साइड इफेक्ट्स

ज्यादातर मामलों में इलाज की शुरुआत बर्थ कंट्रोल पिल्स या हार्मोनल दवाओं से होती है. ये पीरियड्स को रेगुलर तो कर देती हैं, लेकिन साइड इफेक्ट्स, जैसे- मूड स्विंग्स, वजन बढ़ना, जी मिचलाना और थकान—अक्सर महिलाओं को परेशान करते हैं. कई बार फोकस सिर्फ फर्टिलिटी पर रहता है न कि रोजाना के लक्षणों और मेंटल हेल्थ पर.

नेचुरल तरीके से कैसे करें PCOS के खतरे को कम?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि PCOS का बड़ा कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस और लाइफस्टाइल इंबैलेंस है. यही वजह है कि आज कई महिलाएं दवाओं से दूर जाकर नेचुरल तरीका अपना रही हैं, जैसे- बैलेंस डाइट, एक्सरसाइज, योग, स्ट्रेस मैनेजमेंट और अच्छी नींद. न्यूट्रिशनिस्ट्स का कहना है कि फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर खाना, और रिफाइंड कार्ब्स से दूरी, हार्मोन बैलेंस में मदद कर सकती है.

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बैलेंस है जरूरी

PCOS का मतलब दवाओं को पूरी तरह नकारना नहीं है. जरूरत पड़ने पर मेडिकल ट्रीटमेंट जरूरी है, लेकिन उसके साथ लाइफस्टाइल  में सुधार सबसे जरूरी चीज है. योग, वॉकिंग, स्ट्रेस कम करने की आदतें और सही पोषण ये सब मिलकर PCOS को मैनेज करने में मदद करते हैं.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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