Overthinking Causes Indigestion?: क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब दिमाग बहुत ज्यादा सोच में डूबा होता है, तो पेट भी गड़बड़ाने लगता है? कभी एसिडिटी, कभी गैस, कभी पेट दर्द तो कभी भूख न लगना ये समस्याएं आज के समय में बहुत आम हो गई हैं. अक्सर लोग इसका कारण गलत खानपान या बाहर का खाना मान लेते हैं, लेकिन असल वजह कई बार हमारा दिमाग होता है. जो लोग हर बात को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचते हैं, जिन्हें छोटी-छोटी बातों की चिंता सताती रहती है, उनका पाचन तंत्र धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि दिमाग और पेट का रिश्ता बहुत गहरा है. इसे ही ब्रेन गट कनेक्शन कहा जाता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ज्यादा सोचने से पाचन क्यों बिगड़ता है और इससे कैसे बचा जा सकता है.
ज्यादा सोचने का मतलब क्या है?
ज्यादा सोचना यानी किसी बात को बार-बार दिमाग में दोहराना, भविष्य की चिंता करना, हर स्थिति के नेगेटिव पहलू पर फोकस करना. ऐसे लोग जल्दी तनाव में आ जाते हैं, मन कभी शांत नहीं रहता, दिमाग लगातार एक्टिव मोड में रहता है. यही आदत पाचन तंत्र पर सीधा असर डालती है.
दिमाग और पेट का गहरा कनेक्शन
हमारा पेट सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करता, बल्कि इसमें लाखों नर्व्स होती हैं. इसी वजह से पेट को अक्सर दूसरा दिमाग भी कहा जाता है. जब दिमाग परेशान रहता है, तो उसका असर इन नर्व्स पर पड़ता है और पाचन प्रक्रिया धीमी या असंतुलित हो जाती है.
1. तनाव बढ़ते ही पाचन क्यों बिगड़ता है?
जब हम ज्यादा सोचते हैं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) बढ़ जाता है. यह हार्मोन पाचन रसों के स्राव को कम कर देता है. आंतों की मूवमेंट बिगड़ जाती है. खाना ठीक से नहीं पच पाता. इससे गैस, अपच, कब्ज या डायरिया की समस्या होने लगती है.
2. ज्यादा सोचने से ब्लड फ्लो बदल जाता है
तनाव की स्थिति में शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है. दिमाग और मांसपेशियों को ज्यादा खून मिलने लगता है. पेट और आंतों को कम, इससे पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है और भारीपन महसूस होता है.
3. एंग्जायटी और IBS का रिश्ता
जो लोग बहुत ज्यादा सोचते हैं, उनमें IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) की समस्या ज्यादा देखी जाती है. इसके लक्षणों में शामिल है हैं बार-बार पेट दर्द, कभी कब्ज, कभी दस्त, खाने के बाद बेचैनी. यह साफ दिखाता है कि मानसिक स्थिति और पेट की सेहत कितनी जुड़ी हुई है.
4. नींद खराब, पाचन और ज्यादा कमजोर
ओवरथिंकिंग करने वाले लोग अक्सर देर तक जागते रहते हैं, नींद पूरी नहीं ले पाते, नींद की कमी से पाचन एंजाइम्स का बैलेंस बिगड़ता है, जिससे अगला दिन पेट के लिए और भी मुश्किल हो जाता है.
पाचन सुधारने के लिए सोच पर कैसे लगाएं ब्रेक? | How to Stop Overthinking to Improve Digestion?
- खाना खाते समय मोबाइल और टेंशन से दूर रहें.
- रोज 10-15 मिनट गहरी सांस या ध्यान करें.
- हल्की एक्सरसाइज या वॉक अपनाएं.
- समय पर सोने की आदत डालें.
- बहुत मसालेदार और तला-भुना कम करें.
- अपनी चिंता किसी से शेयर करना सीखें.
ज्यादा सोचना सिर्फ दिमाग को ही नहीं, पेट को भी कमजोर बनाता है. अगर आप बार-बार पेट की समस्या से जूझ रहे हैं और मेडिकल रिपोर्ट्स नॉर्मल आ रही हैं, तो एक बार अपनी मेंटल स्टेट पर जरूर ध्यान दें.
जब दिमाग शांत होता है, तभी पेट भी सही तरीके से काम करता है. सोच पर कंट्रोल और लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव आपके पाचन को फिर से मजबूत बना सकते हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














