भारत में बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान की आदतों का असर अब साफ तौर पर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है. इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने एक गंभीर चिंता की ओर इशारा किया है. देश के कई राज्यों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है और तेलंगाना भी इससे अछूता नहीं है. यह रिपोर्ट बताती है कि अगर समय रहते रोकथाम के कदम नहीं उठाए गए, तो मोटापा आने वाले सालों में एक बड़ी स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौती बन सकता है.
तेलंगाना समेत कई राज्यों में बढ़ा मोटापे का ग्राफ
सर्वे के अनुसार, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-4) के आंकड़ों में तेलंगाना में ओवरवेट महिलाओं की संख्या 28.6 प्रतिशत से बढ़कर 30.1 प्रतिशत हो गई है. वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 24.2 प्रतिशत से बढ़कर 32.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है.
यह बढ़ोतरी सिर्फ तेलंगाना तक सीमित नहीं है. कुछ अन्य राज्यों में भी स्थिति चिंताजनक है. उदाहरण के तौर पर, दिल्ली (NCT) में महिलाओं में मोटापे की दर 41.3 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों में यह 38 प्रतिशत है. तमिलनाडु में पुरुषों में मोटापा 37 प्रतिशत और महिलाओं में 40.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है. आंध्र प्रदेश में भी महिलाओं (36.3 प्रतिशत) और पुरुषों (31.1 प्रतिशत) में मोटापे के मामले तेजी से बढ़े हैं.
अनहेल्दी डाइट से जुड़ा भारत का 54 प्रतिशत बीमारी बोझ
इकोनॉमिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि भारत में कुल बीमारी के बोझ का करीब 54 प्रतिशत हिस्सा अनहेल्दी खान-पान की वजह से है. ज़्यादा शुगर और फैट से भरपूर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन इस समस्या को और गंभीर बना रहा है. रिपोर्ट साफ तौर पर चेतावनी देती है कि मोटापा अब एक चिंताजनक स्थिति बन चुका है और नागरिकों को हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए रोकथाम के उपाय बेहद जरूरी हैं.
एडल्ट आबादी में मोटापा बनता जा रहा है बड़ा खतरा
सर्वे को संसद में पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारत की एडल्ट आबादी में मोटापा एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रहा है. सर्वे में कहा गया है कि अगर भारत को अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का पूरा लाभ उठाना है, तो ज़रूरी है कि लोगों की डाइट बैलेंस और विविध हो.
प्रोसेस्ड फूड और फिजिकल इनएक्टिविटी बढ़ा रहे खतरा
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया है कि बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड का सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और विविध भोजन तक सीमित पहुंच, ये सभी मिलकर माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी और मोटापे की समस्या को बढ़ा रहे हैं.
बच्चों और शहरी आबादी में मोटापा तेजी से बढ़ा
वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वयस्कों में मोटापे की दर पिछले कुछ सालों में तीन गुना से ज्यादा हो चुकी है. बच्चों में मोटापे की बढ़ोतरी के मामले में भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाले देशों में शामिल है, वियतनाम और नामीबिया के बाद.
NFHS के आंकड़े यह भी बताते हैं कि शहरी भारत में मोटापा ग्रामीण इलाकों की तुलना में कहीं ज्यादा है. शहरी पुरुषों में मोटापे की दर 29.8 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण पुरुषों में यह 19.3 प्रतिशत है.
NFHS-5 के आंकड़े और बढ़ती उम्र का खतरा
NFHS-5 के अनुसार, 18 से 69 साल के पुरुषों में मोटापा 18.9 प्रतिशत से बढ़कर 22.9 प्रतिशत हो गया है. महिलाओं में यह आंकड़ा 20.6 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत तक पहुंच गया है. सर्वे चेतावनी देता है कि कुछ राज्यों में बढ़ती उम्र की आबादी के साथ मोटापा मिलकर एक गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.
इकोनॉमिक सर्वे का साफ संदेश
इकोनॉमिक सर्वे का साफ संदेश है अगर भारत को हेल्दी और प्रोडक्टिव बनाना है, तो बैलेंस डाइट, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी और प्रोसेस्ड फूड से दूरी जैसे कदम अब टाले नहीं जा सकते. यही समय है जब रोकथाम को प्राथमिकता देकर देश को एक हेल्दी फ्यूचर की ओर ले जाया जाए.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














