आजकल पीठ दर्द की शिकायत बहुत आम हो गई है और इसका सबसे बड़ा कारण बन रहा है स्लिप डिस्क. आयुर्वेद में इसके पीछे के कारण और उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया है. आसान शब्दों में कहें तो हमारी रीढ़ की हड्डियों के बीच की इंटरवर्टिब्रल डिस्क कभी-कभी अपनी जगह से खिसक जाती है या दब जाती है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है. इसका असर पीठ और पैरों में दर्द, झनझनाहट या कमजोरी के रूप में दिखता है. आयुर्वेद इसे कटिग्रह या कटिशूल जैसी अवस्थाओं से जोड़ता है और इसके कारणों को शरीर की दोष संरचना से समझता है.
क्यों होती है स्लिप डिस्क की समस्या- (Why does the problem of slip disc occur)
स्लिप डिस्क अक्सर गलत आदतों और जीवनशैली की वजह से होती है. लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठना, खासकर कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करते हुए, रीढ़ की हड्डियों पर दबाव डालता है. भारी सामान उठाते समय गलत तरीके से उठाना भी डिस्क को खिसकने पर मजबूर कर सकता है.
उम्र बढ़ने के साथ डिस्क का प्राकृतिक रूप से कमजोर होना, मोटापा और शरीर पर अतिरिक्त भार, चोट या झटका और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी बातें इसे और बढ़ा देती हैं.
आयुर्वेद में इसका कारण वात दोष का असंतुलन माना जाता है. वात दोष जब बढ़ता है, तो शरीर की लचक और सहनशीलता कम हो जाती है. इसी वजह से रीढ़ की हड्डियां और डिस्क कमजोर हो जाती हैं. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इसे सुधारने के लिए केवल दर्द कम करना ही नहीं, बल्कि शरीर की लचीलापन और मांसपेशियों को मजबूत करना भी जरूरी है.
स्लिप डिस्क से कैसे करें बचाव- (How to prevent slip disc)
बचाव के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं. लंबे समय तक बैठने से बचें और हर 30-40 मिनट पर थोड़ा चलें. नियमित हल्का व्यायाम, स्ट्रेचिंग, योग और प्राणायाम जैसे भुजंगासन, मकरासन और शवासन रीढ़ को मजबूत और स्थिर रखते हैं. आयुर्वेदिक तेल मालिश और गर्म सिकाई भी मांसपेशियों को आराम देती हैं और नसों पर दबाव कम करती हैं.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














