सर्दियों में प्रेग्नेंसी है ज्यादा नाजुक, आयुर्वेद और साइंस ने बताए मां-बच्चे को सुरक्षित रखने के आसान तरीके

Pregnancy Care in Winter: आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस दोनों मानते हैं कि अगर इस मौसम में सही रूटीन, बैलेंस डाइट और समझदारी भरी देखभाल अपनाई जाए, तो सर्दियां मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित और हेल्दी रह सकती हैं.

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Pregnancy Care in Winter: सर्दियों में गर्भावस्था डर का नहीं, समझदारी का समय है.

Ayurveda Pregnancy Tips for Winter: सर्दी का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं, कम धूप और बदलता तापमान लेकर आता है. आम लोगों के लिए यह मौसम थोड़ा आराम और आलस भरा हो सकता है, लेकिन, गर्भवती महिलाओं के लिए यह समय एक्स्ट्रा सावधानी मांगता है. प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम थोड़ा कमजोर हो जाता है. ऐसे में सर्दी-जुकाम, बदन दर्द, जोड़ों में अकड़न और थकान जल्दी असर दिखा सकती है. आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस दोनों मानते हैं कि अगर इस मौसम में सही रूटीन, बैलेंस डाइट और समझदारी भरी देखभाल अपनाई जाए, तो सर्दियां मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित और हेल्दी रह सकती हैं.

सर्दियों में शरीर को गर्म रखना क्यों जरूरी?

आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में वात दोष बढ़ जाता है, जिससे शरीर में रूखापन, ठंड लगना और दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. गर्भवती महिला अगर खुद को पर्याप्त गर्म रखती है, तो वात संतुलन में रहता है और शरीर सहज महसूस करता है.

विज्ञान भी कहता है कि ठंड में शरीर को अपना तापमान बनाए रखने के लिए ज्यादा एनर्जी खर्च करनी पड़ती है, जिससे थकान बढ़ सकती है. इसलिए ऊनी और ढीले आरामदायक कपड़े पहनें. सिर और पैरों को ढककर रखें. अचानक ठंडी हवा से बचें. ये छोटी आदतें शरीर की गर्मी बनाए रखने में मदद करती हैं.

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धूप और विटामिन डी की अहमियत:

सर्दियों में धूप कम मिलती है, लेकिन विटामिन डी गर्भावस्था में बेहद जरूरी होता है. यह मां की हड्डियों को मजबूत करता है. बच्चे की हड्डियों और इम्यून सिस्टम के विकास में मदद करता है. रोज 15-20 मिनट हल्की धूप में बैठना विटामिन डी पाने का आसान और प्राकृतिक तरीका है.

प्यास कम लगती है, लेकिन पानी जरूरी है:

सर्दियों में अक्सर प्यास कम लगती है पर इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी कम चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, गुनगुना पानी पाचन सुधारता है, शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है, कब्ज और गैस की समस्या कम करता है.

विज्ञान भी मानता है कि पर्याप्त पानी पीने से यूरिन इन्फेक्शन, थकान और कब्ज का खतरा कम होता है, जो गर्भावस्था में आम समस्याएं हैं. गुनगुना पानी, सूप और हल्की हर्बल चाय शरीर को अंदर से गर्म रखती हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाती हैं.

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अचानक तापमान बदलने से क्यों बचें? | Why Should You Avoid Sudden Temperature Changes?

ठंडे कमरे से सीधे गर्म जगह या बाहर की ठंडी हवा में जाना गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
आयुर्वेद इसे शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ने वाला मानता है.
विज्ञान कहता है कि अचानक तापमान बदलने से शरीर को ढलने का समय नहीं मिलता.

घर से बाहर निकलते समय कुछ सेकंड दरवाजे या बालकनी में रुककर बाहर जाएं, ताकि शरीर धीरे-धीरे मौसम के अनुसार ढल सके.

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सर्दियों में खान-पान बने आपकी ताकत :

  • इस मौसम में सही खाना गर्भवती महिला की सबसे बड़ी सुरक्षा है.
  • आयुर्वेद के अनुसार, पौष्टिक और हल्का गर्म भोजन शरीर को एनर्जी देता है.
  • गाजर, चुकंदर, पालक, शकरकंद जैसी मौसमी सब्जियां.
  • आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं.
  • खून बढ़ाने और बच्चों की ग्रोथ में मदद करती हैं.

विज्ञान भी इन फूड्स को इम्यूनिटी बढ़ाने वाला मानता है. सर्दियों में गर्भावस्था डर का नहीं, समझदारी का समय है. शरीर को गर्म रखना, पर्याप्त पानी पीना, सही खान-पान और थोड़ी धूप, ये छोटे कदम मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखते हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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