मिथ्स और फैक्ट्स: क्या कुछ घंटे भूखे रहने से शरीर खुद डिटॉक्स होने लगता है? जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं

Detox Body Myths: क्या वाकई भूखे रहने से शरीर के अंदर की गंदगी साफ हो जाती है? यहां हम सरल भाषा में सच और मिथ को अलग करेंगे. साथ ही एक्सपर्ट की इस पर क्या राय है वह भी जानिए.

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Detox Body Myths: क्या फास्ट करने से बॉडी डिटॉक्स हो जाती है?

Myths and Facts: आजकल डिटॉक्स और फास्टिंग शब्द हर जगह सुनने को मिलते हैं. इंस्टाग्राम पोस्ट हो, सेलिब्रिटी टिप या ऑफिस का नया ट्रेंड. लोग कहते हैं थोड़े घंटे भूखे रहो, शरीर खुद अपने आप अंदर से साफ कर देगा. यह अट्रैक्टिव लगता है कि कम मेहनत में अंदर का जहर निकल जाए. पर सवाल यह है क्या शरीर सच में कुछ घंटे या एक दिन के उपवास से डिटॉक्स मोड में चला जाता है? या यह सिर्फ एक चालाक मार्केटिंग लाइन है? क्या वाकई भूखे रहने से शरीर के अंदर की गंदगी साफ हो जाती है? यहां हम सरल भाषा में सच और मिथ को अलग करेंगे. साथ ही एक्सपर्ट की इस पर क्या राय है वह भी जानिए. 

सबसे पहले डिटॉक्स का मतलब क्या है?

मेडिकल लैंग्वेज में डिटॉक्स का मतलब अक्सर शरीर से टॉक्सिन्स का निकलना माना जाता है. असल में यह काम लिवर, किडनी, फेफड़े और त्वचा जैसी बॉडी सिस्टम अपने आप करती हैं. इतना सरल और प्रभावी कि किसी गड़बड़ डाइट की जरूरत नहीं. कई प्रमुख हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन कहती हैं कि बाजार में बिकने वाले डिटॉक्स क्लीन्‍स या जूस क्लीन्स का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है.

क्या कुछ घंटे भूखे रहने (Intermittent Fasting) से डिटॉक्स होता है?

मायो क्लिनिक के डॉ. डोनाल्ड हेंस्रड ने कहा, इंटरमिटेंट फास्टिंग कुछ लोगों के लिए वजन कम करने या सूजन घटाने में मददगार साबित हुई है, पर इसका अर्थ यह नहीं कि शरीर अचानक सारे टॉक्सिन्स को बाहर निकाल दे. फास्टिंग से कुछ बॉडी प्रोसेसेज (जैसे ऑटोफैगीया सेल्स का खुद को रिपेयर करना) एक्टिव हो सकती हैं, पर ये प्रक्रियाएं डिटॉक्स का प्रमाण नहीं हैं.

"यह एक खतरनाक रास्ता है. मैंने ऐसे लोगों में कुपोषण देखा है जिन्होंने कैलोरी कम करने को बहुत ज्यादा कर दिया है... फिर भी इससे कुपोषण होता है, जो नुकसानदायक है." और उन्होंने कहा कि "कुछ प्रक्रियाएं सूजन घटा सकती हैं, पर लंबे समय के प्रभावों का पता लगाने के लिए और स्टडीज चाहिए."   

क्या लंबे समय तक भूखा रहने से नुकसान भी हो सकता है?

हां, अनजान तरीके से या बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे उपवास से पोषण की कमी, कमजोरी, ब्लड शुगर में गिरावट और कुछ मामलों में मेटाबॉलिक समस्याएं हो सकती हैं. मायो क्लिनिक और अन्य संस्थान सलाह देते हैं कि किसी भी फास्टिंग प्रोटोकॉल को शुरू करने से पहले अपने हेल्थकेयर प्रोवाइडर से सलाह लें.

डिटॉक्स के वादे सुनकर तुरन्त उपवास मत करिए:

अगर वजन घटाना या सूजन घटाना उद्देश्य है तो बैलेंस डाइट, रेगुलर मूवमेंट बेहतर और सुरक्षित रास्ता है. किसी भी फास्टिंग प्रोग्राम से पहले डॉक्टर से सलाह लें. खासकर अगर आप गर्भवती हैं, डायबिटीज या ब्लड प्रेशर गड़बड़ हो.

कुछ घंटे भूखे रहने से शरीर की कुछ उपयोगी प्रक्रियाएं एक्टिव हो सकती हैं पर यह डिटॉक्स की पूरी कहानी नहीं है. मार्केटेड क्लीनज और जूस डाइट्स पर अंधे भरोसे से बचें.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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