रोज की ये 7 छोटी आदतें बन सकती हैं तेज सिरदर्द की वजह, AIIMS-ट्रेंड डॉक्टर ने किया खुलासा

कई लोग दवाइयों के सहारे सिर दर्द से राहत पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन फिर भी दर्द बार-बार लौट आता है. ऐसे में AIIMS-ट्रेंड न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सेहरावत की एक बात लोगों की आंखें खोलने वाली है.

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आइए जानते हैं आपकी वो 7 छोटी आदतें जिससे सिरदर्द उभरता है.

Sirdard ke 7 karan : सिरदर्द एक ऐसी परेशानी है जो किसी का भी पूरा दिन खराब कर सकती है. कभी हल्का भारीपन, कभी तेज धड़कता दर्द और कभी आंखों के पीछे चुभन. यह समस्या आज हर दूसरे इंसान को परेशान कर रही है. कई लोग दवाइयों के सहारे इससे राहत पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन फिर भी दर्द बार-बार लौट आता है. ऐसे में AIIMS-ट्रेंड न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सेहरावत की एक बात लोगों की आंखें खोलने वाली है.

आइए जानते हैं आपकी वो 7 छोटी आदतें जिससे सिरदर्द उभरता है-

सुबह का नाश्ता स्किप करना

डॉ. प्रियंका ने सोशल मीडिया पर शेयर किए गए अपने वीडियो में साफ कहा कि करीब 80 से 90 प्रतिशत सिरदर्द के मरीजों में दर्द की वजह कोई बड़ी बीमारी नहीं, बल्कि उनकी रोज की आदतें होती हैं. अगर इन आदतों को नहीं बदला गया, तो चाहे कितने भी डॉक्टर बदल लिए जाएं, सिरदर्द ठीक नहीं होगा.

डॉक्टर के मुताबिक सबसे बड़ी गलती होती है सुबह का नाश्ता स्किप करना. कई लोग जल्दी में या वजन घटाने के चक्कर में नाश्ता नहीं करते. इससे शरीर में शुगर लेवल गिरता है और सिरदर्द शुरू हो जाता है. इसी तरह अगर खाने का कोई तय समय न हो, कभी देर से लंच और कभी रात का खाना मिस, तो दिमाग पर इसका सीधा असर पड़ता है.

देर रात जगना

देर रात तक जागना भी सिरदर्द की बड़ी वजह है. जब हम रोज देर से सोते हैं, तो शरीर और दिमाग को पूरा आराम नहीं मिल पाता. ऊपर से अगर सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन देखते रहें, तो नींद और ज्यादा खराब हो जाती है. इससे सुबह उठते ही सिर भारी लगने लगता है.

फिजिकल एक्टिविटी की कमी

फिजिकल एक्टिविटी की कमी भी एक अहम कारण है. पूरा दिन बैठे रहना, न चलना-फिरना, न कोई एक्सरसाइज – इससे शरीर में तनाव जमा होता है, जो सिरदर्द को जन्म देता है. इसके अलावा पानी कम पीना यानी डिहाइड्रेशन भी सिरदर्द को ट्रिगर करता है. कई बार लोग समझ ही नहीं पाते कि सिर्फ पानी की कमी से भी सिर दर्द हो सकता है.

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काम का दबाव

लगातार तनाव में रहना, ज्यादा सोचना और काम का दबाव भी इस समस्या को बढ़ाता है. दिमाग जब हर वक्त अलर्ट मोड में रहता है, तो दर्द होना आम बात है. डॉ. प्रियंका का कहना है कि दवाइयां कुछ समय के लिए राहत दे सकती हैं, लेकिन अगर लाइफस्टाइल नहीं सुधरी, तो सिरदर्द पीछा नहीं छोड़ेगा.

इसलिए जरूरी है कि हम अपनी दिनचर्या पर ध्यान दें, समय पर खाना खाएं, पूरी नींद लें, थोड़ा चलें-फिरें और खुद को हाइड्रेट रखें. कई बार छोटी-छोटी आदतें ही बड़े दर्द की वजह बन जाती हैं.
 

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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