Meta पर लगा करोड़ों का जुर्माना! बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल, जानें क्या है पूरा मामला...

US Court Social Media Trial: अमेरिका में एक बड़ी जूरी ने मेटा की सर्विस इस्तेमाल करने वाले बच्चों को होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है और कंपनी करीब 375 मिलियन डॉलर यानी करीब 3,000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.

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US Court Social Media Trial:  फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप वाली कंपनी मेटा कानूनी संकट में फंस गई है. अमेरिका में एक बड़ी जूरी ने मेटा की सर्विस इस्तेमाल करने वाले बच्चों को होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है और कंपनी करीब 375 मिलियन डॉलर यानी करीब 3,000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.

क्या रहा जूरी का फैसला?

नौ दिनों में 40 घंटे से ज़्यादा सोच-विचार के बाद, कैलिफ़ोर्निया के जूरी सदस्यों ने तय किया कि मेटा और यूट्यूब ने अपने प्लेटफॉर्म के डिज़ाइन या ऑपरेशन में लापरवाही की थी और कंपनी की यह लापरवाही पिटीशनर को नुकसान पहुंचानें में एक बड़ा कारण थी, जिसके कारण पीड़ित उनकी मानसिक सेहत बिगड़ती गई. अब यह जुर्माना और बढ़ सकता है, क्योंकि जूरी ने माना कि कंपनियों ने गलत इरादे से या बहुत ही खराब व्यवहार से काम किया, जिसका मतलब है कि आगे और सबूत सुने जाएंगे और सज़ा का अंतिम फैसला होगा. बता दें, ट्रायल शुरू होने से पहले TikTok और Snap समझौता कर चुके थे, इसलिए आखिर में Meta और YouTube ही केस में बचे थे. मेटा ने इस फैसले पर नाराज़गी जताई और कहा, “हम सम्मान के साथ फैसले से सहमत नहीं हैं और अपने कानूनी ऑप्शन देख रहे हैं.”

पिटीशनर ने क्या कहा?

जूरी ने करीब एक महीने तक वकीलों की दलीलें, गवाही और सबूत सुने साथी ही उन्होंने खुद पिटीशनर से भी सुना, जिसे डॉक्यूमेंट्स में KGM या केली के तौर पर पहचाना गया है. केली का कहना है कि उन्होंने सिर्फ 6 साल की उम्र में यूट्यूब और 9 साल की उम्र में इंस्टाग्राम इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था और बचपन में वह लगभग पूरा दिन सोशल मीडिया पर रहती थी. 

केली ने कोर्ट में आकर बताया कि कैसे वह बचपन से प्लेटफॉर्म के “इनफिनिट स्क्रॉल”, ऑटोप्ले वीडियो और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन की वजह से स्क्रीन से हट ही नहीं पाती थी. उनकी वकीलों की टीम, जिसकी अगुवाई मार्क लैनियर कर रहे थे, ने दलील दी कि प्लेटफॉर्म के कई डिज़ाइन फीचर्स खास तौर पर इस तरह बनाए गए थे कि बच्चे उन्हें छोड़ न सकें और यही डिज़ाइन उसकी मानसिक परेशानियों को बढ़ाने में बड़ा कारण बना.

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सोशल मीडिया का कंटेंट नहीं, डिजाइन पर उठे सवाल

जूरी मेंबर्स से कहा गया कि कि वे यह न देखें कि केली ने सोशल मीडिया पर कौन-सा कंटेंट देखा था, क्योंकि अमेरिकी कानून के अनुसार कंपनियों को यूज़र द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट की जिम्मेदारी से छूट मिलती है. इसलिए केस सिर्फ इस बात पर केंद्रित रहा कि प्लेटफॉर्म का डिज़ाइन बच्चों को किस तरह प्रभावित करता है. मेटा ने कोर्ट में तर्क दिया कि केली पहले से ही मानसिक समस्याओं से जूझ रही थी और उसके घर का माहौल भी उसकी हालत खराब होने का बड़ा कारण था. कंपनी ने यह भी कहा कि उसके किसी भी डॉक्टर ने सोशल मीडिया को उसकी मानसिक परेशानी का कारण नहीं बताया. हालांकि कानून के हिसाब से पिटीशनर को यह साबित नहीं करना था कि सोशल मीडिया ही सबकी जड़ है, बल्कि सिर्फ यह दिखाना था कि सोशल मीडिया ने नुकसान पहुंचाने में “महत्वपूर्ण भूमिका” निभाई.

यूट्यूब ने अपनी तरफ से दलील दी कि वह एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि टीवी की तरह एक वीडियो सर्विस है और जैसे-जैसे केली बड़ी हुई, उसका यूट्यूब इस्तेमाल कम होता गया. हालांकि पिटीशनर के वकीलों ने कहा कि यूट्यूब शॉर्ट्स में मौजूद “इनफिनिट स्क्रॉल” बच्चों को स्क्रीन पर रोके रखने की आदत डाल देता है, जिससे लत जैसी स्थिति बनती है. दोनों कंपनियों ने यह भी कहा कि उनके पास सुरक्षा फीचर्स मौजूद हैं जिनसे बच्चे अपने इस्तेमाल को मॉनिटर कर सकते हैं या माता-पिता कंट्रोल सेट कर सकते हैं.

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केली की वकील ने क्या कहा?

यह केस सिर्फ एक मामले का फैसला नहीं है, बल्कि इसे एक “बेलवेदर ट्रायल” माना जा रहा है यानि यह आने वाले हजारों ऐसे मुकदमों के लिए दिशा तय कर सकता है जो सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ दायर हुए हैं. केली की वकील लॉरा मार्केज़-गैरेट ने कहा कि यह केस ऐतिहासिक है क्योंकि यह पहला मौका है जब मेटा और गूगल के कई आंतरिक दस्तावेज़ सार्वजनिक हुए हैं. उनका कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियां बच्चों के लिए हानिकारक फीचर्स हटाने के बजाय उन पर कमाई के लिए निर्भर रहती हैं और इसलिए बदलाव से बचती हैं. उन्होंने साफ कहा कि पीड़ितों और उनके परिवारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी क्योंकि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी यह समस्या सिर्फ एक मुकदमे से खत्म नहीं होने वाली.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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