क्या होती है मेंटल स्कैनिंग? IIT कानपुर अब हर छात्र के मन की बात जानेगा, सुसाइड रोकने के लिए बड़ा कदम

IIT कानपुर में सुसाइड रोकने के लिए अब हर छात्र की 'मेंटल स्कैनिंग' होगी. मनोचिकित्सक छात्रों से सीधे मिलकर उनके मानसिक स्वास्थ्य का आकलन करेंगे। जानें क्या है पूरा प्लान.

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आपको बता दें कि पिछले दो दशक से IIT के साथ जुड़े मशहूर मनोचिकित्सक डॉ. आलोक बाजपेई और उनकी टीम इस पूरे मिशन को लीड करेगी.

बीते कुछ समय से देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, IIT कानपुर से ऐसी खबरें आ रही थीं जिन्होंने सबको परेशान कर दिया था. पिछले दो सालों में यहां 8 छात्रों ने सुसाइड जैसा खौफनाक कदम उठाया. इन घटनाओं ने न केवल छात्रों के परिवार, बल्कि संस्थान के प्रशासन को भी झकझोर कर रख दिया है. ऐसे में अब IIT कानपुर प्रशासन ने एक बहुत ही ठोस और सराहनीय फैसला लिया है.

संस्थान अब अपने हर एक छात्र की 'मेंटल स्कैनिंग' कराएगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मेंटल स्कैनिंग आखिर होती क्या है और यह छात्रों को डिप्रेशन से कैसे बचाएगी? आइए समझते हैं.

क्या है मेंटल स्कैनिंग?

मेंटल स्कैनिंग का मतलब शरीर के किसी अंग का एक्स-रे या मशीन से टेस्ट करना नहीं है. यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मनोचिकित्सक (Psychiatrists) और काउंसलर्स की टीम सीधे छात्रों से बात करती है. इस बातचीत के जरिए यह समझने की कोशिश की जाती है कि क्या छात्र किसी मानसिक दबाव, अकेलेपन या पढ़ाई के स्ट्रेस से तो नहीं जूझ रहा.

IIT कानपुर का मेंटल स्कैनिंग खास प्लान

संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय किया गया कि छात्रों के मेंटल हेल्थ  को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान की खास बातें कुछ ऐसी हैं:

  • अगले 6 महीने से एक साल के भीतर, काउंसलर्स की टीम एक-एक छात्र से निजी तौर पर मिलेगी.
  • टीम सिर्फ ऑफिस में बैठकर इंतजार नहीं करेगी, बल्कि हॉस्टल, लैब, क्लास और लाइब्रेरी जैसी जगहों पर भी एक्टिव रहेगी.
  • संस्थान में 'सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड वेलबीइंग' बनाया गया है, जो 24 घंटे छात्रों की सहायता के लिए उपलब्ध रहेगा.
विशेषज्ञों की निगरानी

आपको बता दें कि पिछले दो दशक से IIT के साथ जुड़े मशहूर मनोचिकित्सक डॉ. आलोक बाजपेई और उनकी टीम इस पूरे मिशन को लीड करेगी.

क्यों जरूरी है यह कदम?

अक्सर छात्र पढ़ाई के बोझ या करियर की चिंता में इतने दब जाते हैं कि वे अपनी बात किसी से कह नहीं पाते. कई बार वे ऊपर से शांत दिखते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर टूट रहे होते हैं. मेंटल स्कैनिंग के जरिए ऐसे छात्रों की पहचान समय रहते हो जाएगी, जिन्हें काउंसलिंग या डॉक्टरी सलाह की जरूरत है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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