संयुक्त राष्ट्र में गूंजा ध्यान का संदेश, दूसरे World Meditation Day पर गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने किया नेतृत्व

World Meditation Day: गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने स्वयं ध्यान सत्र का नेतृत्व किया. भारत, श्रीलंका, अंडोरा, मैक्सिको, नेपाल सहित कई देशों के स्थायी प्रतिनिधि, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के सदस्य और वैश्विक संस्थानों से जुड़े गणमान्य लोग इस आयोजन में शामिल हुए.

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कार्यक्रम में अलग-अलग देशों के वक्ताओं ने अपने-अपने अनुभव शेयर किए.

World Meditation Day 2025: संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में उस समय एक विशेष और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब दुनिया भर के देशों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर ध्यान (मेडिटेशन) का अनुभव कर रहे थे. अवसर था दूसरे विश्व ध्यान दिवस का, जहां गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने मुख्य भाषण दिया और स्वयं ध्यान सत्र का नेतृत्व किया. भारत, श्रीलंका, अंडोरा, मैक्सिको, नेपाल सहित कई देशों के स्थायी प्रतिनिधि, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के सदस्य और वैश्विक संस्थानों से जुड़े गणमान्य लोग इस आयोजन में शामिल हुए. सभी ने एक स्वर में माना कि आज की वैश्विक, सामाजिक, राजनीतिक और मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में ध्यान की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है.

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प्राचीन ज्ञान और आधुनिक कूटनीति का अनोखा संगम

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्राचीन भारतीय साधना पद्धति ‘ध्यान' को वैश्विक कूटनीति के केंद्र में ला दिया. वैश्विक शांति और सामंजस्य के लिए ध्यान विषय पर आयोजित इस विशेष सत्र में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि आंतरिक शांति के बिना बाहरी शांति संभव नहीं है. उनका मार्गदर्शित ध्यान सत्र इस बात का जीवंत उदाहरण बना कि कैसे हजारों साल पुरानी परंपराएं आज की दुनिया में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं.

दुनिया के देशों ने शेयर किए अपने अनुभव

कार्यक्रम में अलग-अलग देशों के वक्ताओं ने अपने-अपने अनुभव शेयर किए. अंडोरा के राजदूत जोन फोर्नर रोविरा ने बताया कि उनके देश की शिक्षा प्रणाली में ध्यान को शामिल करने से छात्रों की एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है. मैक्सिको की उप-स्थायी प्रतिनिधि राजदूत एलिसिया ग्वाडालूपे बुएनरोस्ट्रो मासियू ने कहा कि स्थायी वैश्विक सामंजस्य की नींव आंतरिक शांति पर ही टिकी है.

नेपाल के राजदूत लोक बहादुर थापा ने ध्यान की हिमालयी सभ्यतागत जड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जलवायु परिवर्तन, तनाव और दुष्प्रचार जैसी आपस में जुड़ी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहायक हो सकता है.

विश्वभर के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक चिंतक हुए शामिल

इस आयोजन में कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें महर्षि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के डॉ. रॉबर्ट श्नाइडर, योगमाता फाउंडेशन की योगमाता केइको आइकावा, ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रमुख बीके मोहिनी पंजाबी, जीवन विज्ञान फाउंडेशन नेपाल के एल. पी. भानु शर्मा, रटगर्स यूनिवर्सिटी के डॉ. लसांथा चंदना गूणतिल्लेके और प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी डॉ. जॉन हेगलिन शामिल थे.

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20 मिनट का ध्यान और संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण शांति

कार्यक्रम का समापन गुरुदेव द्वारा कराए गए 20 मिनट के मार्गदर्शित ध्यान से हुआ. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में कुछ समय के लिए पूर्ण शांति का वातावरण बन गया. यह क्षण इस बात की याद दिलाने वाला था कि प्राचीन परंपराओं से जन्मी साधनाएं आज भी वैश्विक नेतृत्व और नीति निर्माण में नई दिशा दे सकती हैं.

टाइम्स स्क्वायर से दुनिया तक ध्यान का संदेश

जैसे-जैसे दुनिया 21 दिसंबर, विश्व ध्यान दिवस की ओर बढ़ रही है, यह आंदोलन संयुक्त राष्ट्र से बाहर भी चर्चा का विषय बन रहा है. न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित टाइम्स स्क्वायर में ‘World Meditates with Gurudev' लिखे भव्य बिलबोर्ड इस वैश्विक अभियान की गवाही दे रहे हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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