Exercise for Depression and Anxiety: डिप्रेशन और एंग्जायटी आज की दुनिया की सबसे आम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हैं. आमतौर पर इनके इलाज के लिए दवाइयां और मनोचिकित्सा (टॉक थेरेपी) दी जाती हैं. ये तरीके कई लोगों के लिए बेहद प्रभावी भी होते हैं. लेकिन, हर किसी के लिए ये आसान विकल्प नहीं होते. कई बार इलाज महंगा होता है, अपॉइंटमेंट के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट होती है, दवाओं के साइड इफेक्ट का डर रहता है, या फिर समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अभी भी मौजूद कलंक (Stigma) लोगों को मदद लेने से रोकता है. ऐसे में सवाल उठता है क्या एक्सरसाइज एक विकल्प हो सकती है? एक नई रिसर्च का जवाब है हां, कई मामलों में बिल्कुल.
क्या कहती है नई स्टडी?
हाल ही में प्रकाशित एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने मेटा-मेटा-एनालिसिस किया. इसका मतलब है कि उन्होंने पहले से मौजूद 81 मेटा-एनालिसिस (जो खुद कई स्टडीज का विश्लेषण होती हैं) की समीक्षा की. इसमें करीब 80,000 लोगों के डेटा और 1,000 से ज्यादा ट्रायल्स के नतीजे शामिल थे. स्टडी का मकसद था यह साफ समझना कि एक्सरसाइज डिप्रेशन और एंग्जायटी पर कितना असर डालती है और किस तरह की एक्सरसाइज सबसे ज्यादा फायदेमंद है.
स्टडी में क्या पाया गया?
1. डिप्रेशन पर मजबूत असर
स्टडी में पाया गया कि एक्सरसाइज का डिप्रेशन के लक्षणों पर बड़ा प्रभाव पड़ा. कई मामलों में इसका असर थेरेपी और एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के बराबर, या कभी-कभी उनसे बेहतर भी था.
2. एंग्जायटी पर मध्यम असर
एंग्जायटी के लक्षणों में भी साफ सुधार देखा गया, खासकर तब जब लोग रेगुलर और हल्की तीव्रता वाली एक्टिविटी करते रहे.
किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ?
दो ग्रुप्स में सबसे ज्यादा सुधार देखा गया एक 18 से 30 साल के युवा वयस्क, दूसरा हाल ही में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाएं.
नई माताओं के लिए यह खासतौर पर जरूरी है, क्योंकि उन्हें समय की कमी, आत्मविश्वास की कमी और सुविधाओं की कमी जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ता है. रिसर्च बताती है कि अगर उनके लिए एक्सरसाइज को आसान और सुलभ बनाया जाए, तो यह उनकी मानसिक सेहत में बड़ा बदलाव ला सकता है.
किस तरह की एक्सरसाइज सबसे बेहतर? | What Type of Exercise is Best?
एरोबिक एक्टिविटी सबसे प्रभावी
चलना, दौड़ना, साइक्लिंग और तैराकी जैसी एरोबिक एक्सरसाइज डिप्रेशन और एंग्जायटी दोनों में सबसे ज्यादा असरदार पाई गईं.
बाकी भी फायदेमंद
वेट ट्रेनिंग (रेजिस्टेंस ट्रेनिंग) और योग जैसी माइंड-बॉडी एक्सरसाइज भी लाभकारी रहीं.
कैसे करें, यह भी मायने रखता है
- ग्रुप में और प्रोफेशनल की देखरेख में की गई एक्सरसाइज डिप्रेशन के लिए ज्यादा प्रभावी रही.
- हफ्ते में 1-2 बार भी पर्याप्त हो सकता है.
- बहुत तेज या बहुत हल्की, दोनों तरह की तीव्रता फायदेमंद रहीं.
- एंग्जायटी के लिए 8 हफ्तों तक रेगुलर और हल्की तीव्रता (जैसे धीमी चाल से चलना) ज्यादा असरदार रही.
इससे पता चलता है कि सिर्फ ज्यादा नहीं, बल्कि रेगुलर और संरचित एक्सरसाइज मायने रखती है.
इसका मतलब क्या है?
इस रिसर्च से यह साफ होता है कि एक्सरसाइज मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित विकल्प है. खासकर उन लोगों के लिए जो दवा नहीं लेना चाहते या जिन्हें थेरेपी तक पहुंचने में कठिनाई होती है.
हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि हर व्यक्ति अलग होता है. एक्सरसाइज कई लोगों के लिए अकेले काफी हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में दवा और थेरेपी के साथ मिलकर सबसे अच्छा असर देती है.
अगर आप डिप्रेशन या एंग्जायटी से जूझ रहे हैं, तो मदद लेना जरूरी है. अपने डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक से बात करें और पूछें कि आपके ट्रीटमेंट प्लान में एक्सरसाइज कहां फिट बैठती है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














