दिल्ली में बढ़ती आबादी के साथ स्वास्थ्य चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं. साल 2024 की ताजा डेथ रजिस्ट्रेशन रिपोर्ट ने राजधानी की सेहत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक साल में दिल्ली में 1.39 लाख से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं. इन मौतों के पीछे कुछ ऐसी बीमारियां हैं, जो चुपचाप लोगों की जान ले रही हैं.आइए जानते हैं उन 5 बीमारियों के बारे में, जो दिल्ली में सबसे ज्यादा मौतों की वजह बनीं.
दिल्ली में मौतों की कुल तस्वीर (Overall Death Scenario in Delhi)
2024 में दिल्ली में कुल 1,39,480 मौतें दर्ज की गईं, जो 2023 के 1,32,391 मौतों के मुकाबले ज्यादा हैं. औसतन हर दिन करीब 381 लोगों की मौत हुई. इनमें से करीब 61 फीसदी मृतक पुरुष और लगभग 39 फीसदी महिलाएं थीं. ज्यादातर मौतें मेडिकल संस्थानों में दर्ज हुईं, जबकि करीब 35 फीसदी मौतें घर पर ही हुईं.
1. सेप्टीसीमिया: सबसे खतरनाक संक्रमण (Septicemia – A Silent Killer)
रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पतालों में होने वाली मौतों में सबसे बड़ा कारण सेप्टीसीमिया रहा. करीब 11.63 फीसदी मौतें इस गंभीर संक्रमण की वजह से हुईं. यह तब होता है जब संक्रमण खून में फैल जाता है और समय पर इलाज न मिले तो जानलेवा साबित होता है.
2. दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां (Heart & Pulmonary Diseases)
दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां दूसरी बड़ी वजह रहीं. करीब 10.06 फीसदी मौतें हार्ट डिजीज और फेफड़ों के ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्याओं के चलते हुईं. बदलती लाइफस्टाइल, तनाव और गलत खानपान इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं.
3. शॉक से होने वाली मौतें (Shock-related Deaths)
करीब 7.99 फीसदी मौतें ऐसे शॉक के कारण हुईं, जिनका सही कारण तुरंत पता नहीं चल पाया. अचानक ब्लड प्रेशर गिरना या शरीर के अंगों का काम करना बंद कर देना इसकी वजह हो सकता है.
4. टीबी अब भी जानलेवा (Tuberculosis Still Dangerous)
आधुनिक इलाज के बावजूद टीबी अब भी बड़ा खतरा बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, 4.86 फीसदी मौतें टीबी की वजह से हुईं. कमजोर इम्यूनिटी और देर से इलाज इसकी बड़ी वजह हैं.
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5. हाई ब्लड प्रेशर और लिवर डिजीज (Hypertension & Liver Diseases)
हाई ब्लड प्रेशर से 4.50 फीसदी और लिवर की बीमारियों से 4.21 फीसदी मौतें दर्ज की गईं. शराब का सेवन, मोटापा और अनहेल्दी लाइफस्टाइल इन रोगों को बढ़ावा दे रहे हैं.
बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर (Impact on Elderly Population)
रिपोर्ट बताती है कि सबसे ज्यादा मौतें 65 साल से ऊपर के लोगों में हुईं. इससे साफ है कि उम्र बढ़ने के साथ नियमित जांच और बेहतर देखभाल बेहद जरूरी है. ये आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि अगर समय रहते जागरूकता, नियमित हेल्थ चेकअप और सही लाइफस्टाइल नहीं अपनाया गया, तो ये बीमारियां आने वाले समय में और ज्यादा जानलेवा बन सकती हैं.
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