Sheetala Saptami 2026: हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का पर्व बहुत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. यह दिन आरोग्य, स्वच्छता और शीतलता की देवी माता शीतला को समर्पित होता है. मान्यता है कि माता शीतला की पूजा करने से परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. साल 2026 में शीतला सप्तमी का व्रत आज यानी 10 मार्च को रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है. खासकर चेचक, खसरा, फोड़े-फुंसी और त्वचा से जुड़े रोगों से बचाव के लिए उनकी पूजा की जाती है. बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचने के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है.
यह भी पढ़ें- Sheetala Saptami 2026: आज है शीतला सप्तमी, जानें शीतला माता की संपूर्ण पूजा विधि, कथा और आरती
हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है. इस दिन लोग माता शीतला की पूजा कर उनके आशीर्वाद से परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं. आइए ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित से जानते हैं आज के दिन क्या करना शुभ माना जाता है और किन कार्यों को करने से बचना चाहिए-
शीतला सप्तमी के शुभ उपाय
- ज्योतिषाचार्य बताते हैं, शीतला सप्तमी के दिन कुछ खास उपाय करना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन उपायों से माता शीतला की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
- सबसे पहले सुबह स्नान करके माता शीतला की पूजा करनी चाहिए और उन्हें मीठे चावल का भोग लगाना चाहिए. ये चावल गुड़ या गन्ने के रस से बनाए जाते हैं.
- पूजा के समय माता को नीम के पत्ते जरूर चढ़ाने चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि नीम के पत्तों से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और इससे त्वचा संबंधी रोगों से रक्षा मिलती है.
- इस दिन 'ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करना भी बहुत शुभ माना जाता है. इसके अलावा शीतला माता की व्रत कथा और स्तोत्र का पाठ करने से भी घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है.
- जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या अनाज का दान करना भी इस दिन अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और परिवार के स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है.
- संतान सुख प्राप्ति के लिए माता को दही और चावल का भोग लगाएं. मान्यता है कि ऐसा करने से माता शीतला आपकी कामना को जरूर स्वीकार करती हैं.
- इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जाता है. शीतला सप्तमी पर घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता. पूजा के लिए भोजन एक दिन पहले ही बना लिया जाता है और अगले दिन उसी भोजन का भोग माता को लगाया जाता है.
- इसके अलावा इस दिन सिलाई-कढ़ाई, सुई-कैंची का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.
- तामसिक भोजन और नशे से दूर रहना भी जरूरी माना जाता है.
- माता शीतला की पूजा में दीपक या अगरबत्ती न जलाने की भी परंपरा होती है.
ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, शीतला सप्तमी का पर्व हमें स्वच्छता, संयम और स्वास्थ्य का महत्व समझाता है. माता शीतला की सच्चे मन से पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और निरोगी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है.














