शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो रही है. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ जौ बोने की भी परंपरा है. जौ को ज्वारे भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता में नवरात्रि के दौरान जौ का अच्छी तरह अंकुरित होना शुभ माना जाता है. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, जौ बोते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो वे नौ दिनों में अच्छी तरह उग सकते हैं.
नवरात्रि में जौ बोने से पहले करें ये काम
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, जौ को अच्छी तरह अंकुरित करने के लिए नवरात्रि शुरू होने से एक रात पहले कुछ जौ के दानों को पानी में भिगोकर रख सकते हैं. नवरात्रि के पहले दिन पूजा घर को साफ करने के बाद मिट्टी का एक साफ पात्र लें. इसमें शुद्ध मिट्टी भरें और जौ के दानों को समान रूप से फैला दें.
जौ बोने का क्या है सही तरीका
जौ के दाने फैलाने के बाद उनके ऊपर हल्की परत मिट्टी की डालें. इसके बाद थोड़ा साफ पानी डालें. ध्यान रखें कि मिट्टी में जरूरत से ज्यादा पानी न भरें. ज्यादा पानी की वजह से जौ के बीज खराब हो सकते हैं. नवरात्रि के बाकी दिनों में भी जरूरतत के अनुसार थोड़ा-थोड़ा पानी देते रहें.
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जौ का रंग और बढ़ने का तरीका क्या देता है संकेत
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में जौ की बढ़त और रंग को अलग-अलग संकेतों से जोड़कर देखा जाता है. अगर जौ हरे और अच्छी तरह विकसित होते हैं तो इसे शुभ मानाा जाता है. ऐसी मान्यता है कि यह घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक लाभ का संकेत हो सकता है. वहीं जौ का रंग पीला या काला पड़ना शुभ नहीं माना जाता है. इसी तरह अगर जौ बहुत कम उगें, छोटे रहें या टेढ़े-मेढ़े बढ़ें तो इसे काम में आाने वाली बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है.
लंबे और सीधे जौ माने जाते हैं शुभ
जानकारी के अनुसार, अगर जौ लंबे, सीधे और अच्छी तरह अंकुरित होते हैं तो इसे अच्छे स्वास्थ्य, काम में सफलता और घर में शांति का संकेत माना जााता है. हालांकि, जौ की बढ़त पर मौसम, मिट्टी, पानी और बीज की गुणवत्ता जैसे सामान्य कारणों का भी असर पड़ताा है.
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