सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. यह समय पूर्वजों के लिए समर्पित होता है. 26 अक्तूबर से पितृपक्ष शुरू हो चुका है और यह 10 अक्टूबर तक चलेगा. पितृपक्ष के 16 दिनों की अवधि के दौरान लोगों द्वारा अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं. पितृपक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए पाठ करना भी अच्छा रहता है. चलिए आपको बताते हैं पितृपक्ष में किसका पाठ करना चाहिए? पितृ स्तोत्र, पितृ चालीसा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से क्या होता है.
पितृ स्तोत्र पाठ
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।
पितृ स्तोत्र पाठ का नियमित या विशेष अवसरों पर पाठ करने अच्छा माना जाता है. इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है. इससे दिवंगत आत्माओं को शांति, संतुष्टि और सद्गति प्राप्त होती है. परिवार में कलह नहीं होता और बाधाएं दूर रहती है. पितृ स्तोत्र का पाठ सुबह-सुबह या फिर शाम संध्या के समय करना अच्छा माना जाता है.
पितृ चालीसा
पितृ चालीसा की शुरुआत भगवान गणेश और घर के देवताओं के स्मरण से होती है. इसके बाद पितरेश्वर से दया बनाए रखने और जीवन में सही मार्ग दिखाने की प्रार्थना की जाती है. इसमें पितरों को मनुष्य जीवन, परिवार और संस्कारों से जोड़ते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया है. चालीसा में पितरों को संकट के समय सहारा देने वाला बताया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों का स्मरण व्यक्ति को मानसिक बल देता है. धार्मिक मान्यता है कि पितृ चालीसा का श्रद्धा से पाठ या श्रवण करने से व्यक्ति अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करता है.
विष्णु सहस्रनाम
विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र भगवान विष्णु के एक हजार पवित्र नामों का प्रसिद्ध और अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है. पितृपक्ष में भगवान विष्णु के सहस्रनाम का पाठ करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृपक्ष में तर्पण के साथ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से व्यक्ति पितृ ऋण से मुक्त हो जाता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है.
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