पितृपक्ष का समय पूर्वजों के लिए समर्पित होता है. 26 अक्तूबर से पितृपक्ष शुरू हो चुका है और यह 10 अक्टूबर तक चलेगा. पितृपक्ष के 16 दिनों की अवधि के दौरान लोगों द्वारा अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं. पितृपक्ष में कुछ काम-काज को लेकर भी नियम होते हैं. इस दौरान कहा जाता है कि बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए. इसके पीछे कहा जाता है कि पितृपक्ष में बाल और नाखून काटने से पितृ रुष्ट हो जाते हैं. चलिए आपको बताते हैं क्या पितृपक्ष में बाल और नाखून काट सकते हैं और इसके लिए शास्त्र क्या कहते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष पूर्वजों का श्राद्ध करने के लिए अच्छा समय होता है. इस दौरान पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, लेकिन पितृपक्ष में खानपान से लेकर कई नियमों का पालन भी किया जाता है.
पितृपक्ष में क्या नहीं करना चाहिए?
शास्त्रों के मुताबिक, पितृपक्ष के दौरान नया सामान या नए कपड़े खरीदना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इस दौरान गहने, नए वस्त्र, गाड़ी, मकान-जमीन और लोहे का सामान जैसी बड़ी चीजें खरीदना अशुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि नई चीजें हमारे भीतर दिखावे की भावना ला सकती हैं, इसलिए इनसे बचने की सलाह दी जाती है. हालांकि, रोजमर्रा के इस्तेमाल की जरूरी चीजें खरीदने में कोई बुराई नहीं है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों का आयोजन वर्जित माना जाता है. इस निषेध का मुख्य कारण यह है कि यह अवधि पूरी तरह से पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित होती है. पितृपक्ष की प्रकृति अत्यंत गंभीर और संयमित होती है, जबकि मांगलिक कार्यों में उत्सव और उल्लास का माहौल रहता है. माना जाता है कि ऐसे आयोजनों से इस विशेष समय की आध्यात्मिक गंभीरता और शांति प्रभावित हो सकती है. धार्मिक शास्त्रों की मानें तो पितृपक्ष के दौरान सादे और सात्विक कपड़े पहनना अच्छा होता है. पूजा-पाठ और तर्पण के दौरान सफेद, हल्का पीला या अन्य हल्के रंग के कपड़े पहनने चाहिए. सादे कपड़े में रहकर जब आप श्राद्ध करते हैं, तो पूरा ध्यान पितरों की सेवा पर ही रहता है.
क्या पितृपक्ष में बाल और नाखून काट सकते हैं?
पितृपक्षे न कर्तव्यं क्षौरं श्राद्धदिने क्वचित्।
कृते तु तत्र क्षौरे तु केशाः पितृमुखे पतन्ति॥
हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथ धर्म सिंधु में ये एक श्लोक है, जिसके मुताबिक पितृपक्ष में बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए. ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध के दिन क्षौर किया जाता है, कटे हुए बाल पितरों के मुख में गिरते हैं. इसलिए ज्योतिषिद लोगों को सलाह देते हैं कि श्राद्ध के दिनों में बाल कटवाने से पितरों के मुख में बाल गिरते हैं और इससे वो रुष्ट हो जाते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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