Masik Karthigai: मासिक कार्तिगाई कब है, जानिए इसका महत्व और शुभ मुहूर्त

Masik Karthigai: कार्तिगई दीपम या कार्तिकै दीपम तमिल हिंदुओं का एक बड़ा त्योहार है. इस दिन घरों, गलियों और मंदिरों में तेल के दीये जलाए जाते हैं. दीप जलाना अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
मासिक कार्तिगाई
file photo

Masik Karthigai: 2026 में पहला मासिक कार्तिगई नक्षत्र दिन 23 मार्च को पड़ रहा है. हर महीने जब कृतिका (कार्तिगई) नक्षत्र लगता है, उस दिन को कार्तिगई नक्षत्र माना जाता है. यह दिन खास इसलिए माना जाता है, क्योंकि इसी नक्षत्र में प्रसिद्ध कार्तिगई दीपम त्योहार मनाया जाता है, जो तमिल हिंदुओं का सबसे पुराना और महत्वपूर्ण त्योहार है. इस दिन घरों और मंदिरों में तेल के दीये जलाए जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है.

कार्तिगई दीपम क्या है?

कार्तिगई दीपम या कार्तिकै दीपम तमिल हिंदुओं का एक बड़ा त्योहार है. इस दिन घरों, गलियों और मंदिरों में तेल के दीये जलाए जाते हैं. दीप जलाना अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है. यह त्योहार पूरे समुदाय में उत्साह और सकारात्मकता फैलाता है.

मासिक कार्तिगाई का पौराणिक महत्व

यह त्योहार भगवान शिव को समर्पित है. कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने अपनी शक्ति दिखाने के लिए खुद को अनंत ज्योति स्तंभ (एक अंतहीन प्रकाश स्तंभ) में बदल लिया था. इसी घटना की याद में दीप जलाए जाते हैं, जो शिव की दिव्य रोशनी का प्रतीक है.

कार्तिगई दिन क्यों महत्वपूर्ण है?

हर महीने कार्तिगई नक्षत्र आता है, लेकिन तमिल महीने कार्तिगई में पड़ने वाला दिन सबसे खास माना जाता है. इसी दिन कार्तिगई दीपम बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. भक्त मंदिरों में जाते हैं, भगवान शिव की पूजा करते हैं और शाम को दीप जलाते हैं.

Advertisement
तिरुवन्नामलाई में प्रसिद्ध उत्सव

कार्तिगई दीपम का सबसे भव्य उत्सव तिरुवन्नामालाई पहाड़ी पर होता है. पहाड़ी की चोटी पर महादीपम नाम का एक विशाल अग्नि-दीप जलाया जाता है. यह लौ कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती है. हजारों भक्त इसे देखने और भगवान शिव का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. इसे त्योहार का सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक क्षण माना जाता है.

कार्तिगई नक्षत्र कैसे मनाया जाता है?

कार्तिगई नक्षत्र दिन पर लोग सरल और पवित्र तरीके से त्योहार मनाते हैं. घर और मंदिरों में तेल के दीये जलाना, भगवान शिव की पूजा करना, मंदिरों की यात्रा करना, घरों को दीपों की कतारों से सजाना और शाम की दीप जलाने की परंपरा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है.

Advertisement

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
 

Featured Video Of The Day
Bengal Elections 2026: 'TMC के गुंडे'...Suvendu Adhikari ने 'Walk The Talk' में ये क्यों कह दिया?
Topics mentioned in this article