बिना रडार, बिना चेतावनी... ईरान ने कैसे मार गिराए अमेरिका के हाईटेक F‑15E और A‑10 फाइटर जेट?

अमेरिकी F‑15E और A‑10 जैसे हाईटेक फाइटर जेट ईरान में कैसे निशाना बने? क्या ईरान की इन्फ्रारेड‑आधारित एयर डिफेंस तकनीक ने अमेरिकी हवाई वर्चस्व के दावों की असलियत उजागर कर दी है? क्या यह आधुनिक युद्ध की दिशा बदलने वाला मोड़ है?

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नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया. शुक्रवार को ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान F‑15E और A‑10 को मार गिराया है. खुरासान प्रांत और फारस की खाड़ी से लगे इलाकों में गिरे मलबे की तस्वीरें और वीडियो ईरानी मीडिया के जरिए सामने आई हैं. 

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान ने आखिर इतनी आधुनिक 4th जनरेशन एयरक्राफ्ट को निशाना कैसे बनाया?

मिसाइलें नहीं, तकनीक ने बदला खेल

जानकारी और सामने आए वीडियो संकेत देते हैं कि इन हमलों में ईरान ने इन्फ्रारेड‑आधारित (Infrared / IR) सतह‑से‑हवा मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया. सामने आया एक वीडियो ईरानी SAM सिस्टम के थर्मल (Infrared) sight से लिया गया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे टारगेट की गर्मी को लॉक किया गया.

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इन्फ्रारेड सिस्टम की खासियत यह है कि इसमें किसी रडार का इस्तेमाल नहीं होता. ये सिस्टम सीधे विमान के इंजन से निकलने वाली हीट सिग्नेचर को पकड़ते हैं. 

इन्फ्रारेड मिसाइल कैसे काम करती हैं?

दरअसल फाइटर जेट के इंजन आसमान में सबसे ज्यादा गर्मी छोड़ते हैं. IR सिस्टम का कूल्ड थर्मल सीकर उस गर्मी को स्कैन करता है. जैसे ही सबसे ताकतवर हीट सोर्स लॉक होता है, मिसाइल खुद‑ब‑खुद उस लक्ष्य का पीछा करती है और इंटरसेप्ट करती है. इस पूरी प्रक्रिया में कोई रडार सिग्नल नहीं निकलता, यानी दुश्मन को कोई चेतावनी नहीं मिलती.

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ईरान का ‘Majid' SAM सिस्टम?

विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों में ईरान के स्वदेशी ‘Majid' सतह से हवा में मारने वाली मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल हो सकता है. यह सिस्टम खास तौर पर लो‑फ्लाइंग एयरक्राफ्ट, ड्रोन, हेलिकॉप्टर को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. कम ऊंचाई पर उड़ रहे फाइटर जेट्स के पास एवेसिव मैनूवर (बचने) के लिए बहुत कम समय होता है और यही उनकी कमजोरी बनती है.

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पहले भी दिखे संकेत

इससे पहले भी केशम (Qeshm) द्वीप के पास एक F‑15 को नुकसान पहुंचने की खबर आई थी. पायलट किसी तरह विमान को बेस तक लौटाने में कामयाब रहा. यह साफ संकेत था कि ईरानी एयर डिफेंस अमेरिकी विमानों को ट्रैक कर पा रही है.

रडार बनाम इन्फ्रारेड सिस्टम

रडार आधारित SAMइन्फ्रारेड SAM
लंबी दूरी और ऊंचाई पर असरदार लो‑फ्लाइंग टारगेट पर ज्यादा घातक
रडार ऑन होते ही दुश्मन को पता चल जाता हैपूरी तरह साइलेंट सिस्टम
रडार खुद निशाना बन सकता हैपहचान से पहले हमला

यानी रडार सिस्टम ताकतवर हैं, लेकिन जोखिम भरे भी. जबकि इन्फ्रारेड सिस्टम ‘दिखते नहीं, सुनाई नहीं देते' और अचानक वार करते हैं.

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अमेरिकी दावों पर सवाल

यह घटनाक्रम ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका दावा कर रहा था कि उसने ईरान की सैन्य क्षमताएं कमजोर कर दी हैं. कहा जाता है कि अमेरिकी वायुसेना को हवाई क्षेत्र में पूर्ण वर्चस्व हासिल है. लेकिन F‑15E और A‑10 जैसे प्लेटफॉर्म का निशाना बनना इन दावों पर सवाल खड़े करता है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने शायद नई पीढ़ी के हाई‑रिज़ॉल्यूशन इन्फ्रारेड सीकर्स, साइलेंट एयर‑डिफेंस नेटवर्क और लो‑फ्लाइंग फ्लाइट प्रोफाइल की कमजोरी का फायदा उठाकर महंगी और अत्याधुनिक अमेरिकी मशीनरी को चुनौती दी है. यह युद्ध अब केवल मिसाइलों का नहीं, सेंसर, सिग्नेचर और साइलेंट टेक्नोलॉजी की जंग बनता दिख रहा है.

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