What Is OPT Programme : अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले लाखों इंटरनेशनल छात्रों के लिए इस वक्त बड़ी खबर सामने आई है. OPT प्रोग्राम को लेकर वहां जबरदस्त बहस छिड़ गई है और अमेरिकी सरकार ने इसकी नई समीक्षा शुरू कर दी है. प्रशासन ये जांच रहा है कि ये प्रोग्राम सच में अमेरिकी नौकरी बाजार के लिए फायदेमंद है या फिर इससे वहां के युवाओं के रोजगार पर असर पड़ रहा है. टैक्स नियमों से लेकर संभावित धोखाधड़ी और राष्ट्रीय सुरक्षा तक कई बड़े मुद्दों को जांच के दायरे में रखा गया है. यही वजह है कि विदेश में करियर बनाने का प्लान कर रहे छात्रों की धड़कनें तेज हो गई हैं.
OPT प्रोग्राम आखिर है क्या?OPT यानी ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ऐसा प्रोग्राम है जो अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं काम करने की इजाजत देता है. ये सुविधा खास तौर पर F-1 स्टूडेंट वीजा पर पढ़ाई कर रहे छात्रों को मिलती है. छात्र अपनी डिग्री खत्म करने के बाद अपने विषय से जुड़े क्षेत्र में नौकरी कर सकते हैं. आम तौर पर ये अनुमति 12 महीने के लिए होती है. मतलब पढ़ाई के बाद एक साल तक अमेरिका में काम करने का शानदार मौका मिलता है.
STEM छात्रों के लिए गोल्डन चांसअगर किसी छात्र ने साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग या मैथ्स यानी STEM सब्जेक्ट्स में पढ़ाई की है तो उसके लिए ये प्रोग्राम और भी फायदेमंद बन जाता है. ऐसे छात्रों को 12 महीने की अवधि पूरी होने के बाद 24 महीने का एक्स्ट्रा एक्सटेंशन मिल सकता है. यानी कुल मिलाकर 36 महीने तक अमेरिका में काम करने का मौका. यही कारण है कि टेक और इंजीनियरिंग कोर्स करने वाले छात्रों के बीच ये प्रोग्राम बेहद पॉपुलर है.
तेजी से बढ़ रहे हैं OPT वाले छात्र
पिछले कुछ सालों में इस प्रोग्राम का दायरा काफी बढ़ा है. रिपोर्ट्स के अनुसार 2024-25 एकेडमिक ईयर में करीब 2.95 लाख इंटरनेशनल छात्र OPT के तहत अमेरिका में काम कर रहे थे. इनमें बड़ी संख्या भारतीय छात्रों की बताई जाती है. छात्रों की बढ़ती तादाद ने अब अमेरिका में नई बहस को हवा दे दी है.
कौन कर सकता है अप्लाई
OPT के लिए वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जो F-1 वीजा पर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हों. साथ ही कम से कम एक एकेडमिक ईयर पूरा होना जरूरी है. जिस फील्ड में काम करना है वो पढ़ाई से जुड़ा होना चाहिए. छात्र को पहले अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों से वर्क ऑथराइजेशन लेना पड़ता है. मंजूरी मिलने के बाद ही अमेरिका में काम शुरू किया जा सकता है.
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