What Is Dutch Disease : डच डिजीज (Dutch Disease) सुनने में भले ही कोई बीमारी लगे, लेकिन असल में ये एक आर्थिक समस्या है. जब किसी देश को अचानक प्राकृतिक संसाधनों से बहुत ज्यादा कमाई होने लगती है, तो शुरुआत में सब कुछ अच्छा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही कमाई बाकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने लगती है. डच डिजीज एक ऐसी स्थिति है, जब किसी देश को तेल, गैस या सोना जैसे नेचुरल रिसोर्स से अचानक बहुत ज्यादा पैसा मिलने लगता है. इससे देश में पैसा तो बढ़ता है, लेकिन उसकी करेंसी मजबूत हो जाती है. मजबूत करेंसी की वजह से दूसरे सेक्टर जैसे खेती, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट कमजोर पड़ने लगते हैं. धीरे-धीरे पूरा देश सिर्फ एक ही सेक्टर पर निर्भर हो जाता है, जो आगे चलकर खतरा बन सकता है.
डच डिजीज नाम कैसे पड़ा?
इस शब्द की शुरुआत 1960 के दशक में नीदरलैंड में हुई. दरअसल, वहां नेचुरल गैस के बड़े भंडार मिलने के बाद अर्थव्यवस्था में भारी इमबैलेंस देखने को मिला. इसी अनुभव के आधार पर इस आर्थिक स्थिति को डच डिजीज नाम दिया गया. आज भी कई देशों में ये समस्या देखने को मिलती है, जहां खूब कमाई होने के बावजूद देश की बाकी अर्थव्यवस्था साथ में आगे नहीं बढ़ पाती.
क्यों है ये बड़ी समस्या?
जब किसी देश को नेचुरल रिसोर्सेस से ज्यादा इनकम होती है, तो उसकी करेंसी मजबूत हो जाती है. मजबूत करेंसी के चलते उस देश के निर्यात (Export) महंगे हो जाते हैं, जिससे दुनियाभर के मार्केट्स में कॉम्पीटीशन कम हो जाता है. इसके चलते मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर जैसे दूसरे सेक्टर्स कमजोर पड़ने लगते हैं और धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था एक ही रिसोर्स पर निर्भर होने लगती है. डच डिजीज के कारण कई गंभीर आर्थिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं -
उद्योगों में गिरावट (Deindustrialization)
- रोजगार के अवसरों में कमी
- अर्थव्यवस्था का एक ही रिसोर्स पर बहुत ज्यादा निर्भर होना
- लॉन्ग टर्म में आर्थिक उथल-पुथल
कई देशों ने इस समस्या का सामना किया है. इनमें वेनेजुएला, नाइजीरिया और रूस भी शामिल हैं. वेनेजुएला तेल पर ज्यादा निर्भर हो गया, तो वहीं नाइजीरिया ने ऑयल सेक्टर पर ज्यादा फोकस किया. जबकि रूस एनर्जी रिसोर्सेज पर काफी ज्यादा निर्भर है. इन देशों में रिसोर्सेज से इनकम तो बढ़ी, लेकिन दूसरे सेक्टर कमजोर हो गए.
बैलेंस्ड इकॉनमी ही समाधान
डच डिजीज यह सिखाती है कि केवल नेचुरल रिसोर्सेज पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. एक मजबूत और स्टेबल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है कि देश अपने सभी सेक्टर्स, जैसे - उद्योग, कृषि और सर्विसेज को बैलेंस्ड तरीके से आगे बढ़ाए. यही बैलेंस किसी भी देश की असली आर्थिक ताकत बनता है.
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