उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली अपूर्वा पाठक ने सीबीएसई 12वीं परीक्षा में 97% अंक हासिल किए हैं. अपूर्वा पाठक ने बताया कि मेरा इलाका बाढ़ की चपेट में आता रहता है और अक्सर कई महीनों तक बिजली नहीं रहती. मैंने अपने गांव के ही एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई की और उसके बाद मुझे बुलंदशहर के विद्याज्ञान स्कूल में एडमिशन मिल गया, जहां मिली मुफ्त और वर्ल्ड-क्लास शिक्षा ने मेरी जिंदगी ही बदल दी. मेरे पिता टीचर हैं और मेरी मां एक हाउसवाइफ हैं. मेरे तीन भाई-बहन हैं और हम सब एक जॉइंट फैमिली में रहते हैं. मैं हमेशा से पढ़ाई में सबसे आगे रहना चाहती थी. क्योंकि मैंने अपनी पसंद के सब्जेक्ट चुने थे, इसलिए बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी करते समय मुझे बहुत मज़ा आया.
1. आप हर दिन कितने घंटे पढ़ाई करती थीं?
अपूर्वा पाठक ने बताया कि वो हर जिन 3 घंटे पढ़ाई करती थी. अपूर्वा पाठक ने कहा, मैंने ज़्यादातर क्लास के समय ही पढ़ाई की, जब टीचर पढ़ा रहे होते थे, तो मैं नोट्स बनाती थी. अपने सारे डाउट्स वहीं क्लियर कर लेती थी. क्लासरूम के बाहर, मैं हर दिन 3 घंटे ज़्यादा पढ़ाई करती थी ताकि सब्जेक्ट्स को रिवाइज और प्रैक्टिस कर सकूं.
2. आपकी रोज़ की दिनचर्या क्या थी?
अपूर्वा पाठक ने बताया, मैं एक बोर्डिंग स्कूल में रहती हूं, इसलिए मेरी रोज़ की दिनचर्या हमेशा एक जैसी रही है. मैं सुबह करीब 6 बजे उठती थी, 30 मिनट योगा करती थी. फिर करीब 7:30 बजे नाश्ता करती थी, क्लास सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलती थी. उसके बाद मैं थोड़ी देर दोपहर में सोती थी और फिर 1 घंटे सेल्फ-स्टडी के लिए क्लास में जाती थी. शाम को, मैं टहलने या हल्की-फुल्की कसरत के लिए जाती थी. रात के खाने के बाद, मैं रात 9 बजे से 11 बजे तक पढ़ाई करती थी और 12 बजे से पहले सो जाती थी.
3. आपने किन सब्जेक्ट्स पर सबसे ज़्यादा ध्यान दिया?
अपूर्वा पाठक ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, इकोनॉमिक्स मेरे लिए एक नया सब्जेक्ट था और अपने खास शब्दों और डायग्राम्स की वजह से थोड़ा टेक्निकल भी था. इसलिए, मैंने इकोनॉमिक्स पर खास तौर पर ध्यान दिया, यह पक्का किया कि मैं रोज़ नोट्स बनाऊं, रिवाइज करूं और सवालों की प्रैक्टिस करूं. मैं रोज़ पॉलिटिकल साइंस, हिस्ट्री और ज्योग्राफी के मैप्स भी देखती थी.
4. आपने परीक्षा में सभी सवालों को हल करने का क्या तरीका अपनाया?
अपूर्वा पाठक ने कहा, मैंने उसी क्रम में सवालों को हल किया जिस क्रम में वे परीक्षा में दिए गए थे. अगर कोई ऐसा सवाल था जिसका जवाब मुझे याद नहीं आ रहा था, तो मैं उसे आखिर में करती थी. अपना पेपर पूरा करने के बाद, मैंने यह पक्का किया कि मैं अपनी आंसर-शीट को रिवाइज करूं, खासकर उन सवालों को जिनमें मुझे कोई डाउट था. हालांकि, मैंने यह भी पक्का किया कि मैं इस तरह से लिखूं कि अगर आखिर में मेरे पास समय न बचे, तो भी मेरा पेपर अंडरलाइन और मार्जिन के साथ देखने में अच्छा लगे.
5. आप भविष्य में क्या बनना चाहती हैं?
अपूर्वा पाठक ने कहा कि मैं इंडियन सिविल सर्विसेज़ में जाने की इच्छा रखती हूं. मैं सोशल सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहती हूं. एक दिन UN जैसे इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन्स में काम करना चाहती हूं.
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