उत्तर प्रदेश (UP) सरकार ने सभी यूनिवर्सिटीज या कॉलेजों में यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य कर दिया है. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूनिफार्म व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया है. हालांकि उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य नहीं है, जहां पर यूनिफॉर्म की व्यवस्था लागू की गई हो. मध्य प्रदेश, असम, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने सरकारी कॉलेजों में यूनिफॉर्म व्यवस्था पहले से लागू है. खास कर महिला कॉलेजों में. साल 2024 में, मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी कॉलेजों में विद्यार्थियों के लिए समान ड्रेस कोड अनिवार्य करने का निर्णय लिया था. बिहार के भी कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज में छात्रों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड है. विशेष रूप से वोकेशनल और प्रोफेशनल कोर्स के छात्रों के लिए यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य है.
इसके अलावा छत्तीसगढ़ और असम में भी उच्च शिक्षा विभाग ने अपने कई सरकारी यूनिवर्सिटीज में एक समान यूनिफॉर्म कोड लागू किया है. छात्रों का टी-शर्ट, जींस और लेगिंग्स जैसी कैजुअल कपड़े पहनकर आने पर प्रतिबंध है. NEF कॉलेज, गुवाहाटी ने ड्रेस कोड को लेकर अपनी वेबसाइट पर लिखा है, स्टूडेंट्स को सभी वर्किंग डेज़ में क्लास लेक्चर के साथ-साथ कॉलेज फंक्शन, मीटिंग और पब्लिक लेक्चर में आते समय ड्रेस कोड फॉलो करना होगा.
ड्रेस कोड लागू करने का क्या है मकसद
यूनिवर्सिटीज में ड्रेस कोड लागू करने का मकसद छात्रों में समानता की भावना लाना है. साथ ही यूनिवर्सिटी के परिसर में एक गंभीर और पढ़ाई का माहौल पैदा करना होता है. ड्रेस कोड लागू होने से विश्वविद्यालयों में बाहरी तत्वों की पहचान भी हो जाती है. जिससे की कॉलेज का माहौल एकदम सही रहता है. असम जैसे राज्यों में तो पारंपरिक पोशाक को ड्रेस कोड में शामिल किया गया है, ताकि क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा मिल सके.
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