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इस राज्य में सबसे ज्यादा छात्रों ने की खुदकुशी, NCRB के आंकड़े दे रहे गवाही

NCRB Data: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, 2014-2024 के बीच 1.23 लाख से ज्यादा छात्रों ने खुदकुशी की. जानें किस राज्य में सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स ने जान दी और इसकी सबसे बड़ी वजहें क्या रहीं.

इस राज्य में सबसे ज्यादा छात्रों ने की खुदकुशी, NCRB के आंकड़े दे रहे गवाही
भारत में छात्रों की खुदकुशी एक बड़ी चिंता का मामला

नीट पेपर लीक और छात्रों के सुसाइड को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देशभर में चल रहे प्रोटेस्ट भले ही खत्म हो गए हैं, लेकिन देश में छात्रों की आत्महत्या के मामले एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से लेकर 2024 तक 1.23 लाख से ज्यादा छात्रों ने सुसाइड किया है. सबसे ज्यादा मामले दिल्ली या बिहार से नहीं बल्कि किसी और राज्य से है. रिपोर्ट यह भी बताती है कि घर में चल रही परेशानी और एग्जाम में फेल होना सबसे बड़ी वजहे हैं. आइए जानते हैं छात्रों ने की खुदकुशी के मामले सबसे ज्यादा किस राज्य से सामने आए हैं और एनसीआरबी के आंकड़ें क्या कह रहे हैं.

10 साल में 1.23 लाख से ज्यादा छात्रों ने दी जान

NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 से 2024 के बीच देश में 1,23,918 छात्रों ने आत्महत्या की. साल 2014 में छात्र आत्महत्या के 8,068 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 14,488 हो गई. यानी करीब 80% की बढ़ोतरी हुई. इसका मतलब है कि 2024 में औसतन हर दिन करीब 40 छात्रों ने खुदकुशी की.

किस राज्य में छात्र खुदकुशी के मामले सबसे ज्यादा

छात्रों के खुदकुशी के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है. यहां करीब 17,000 स्टूडेंट्स ने अपनी जान दी है. इसके बाद यूपी का नंबर आता है, जहां करीब 10,000 छात्रों ने खुदकुशी की. इसके अलावा मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक भी उन राज्यों में शामिल हैं, जहां छात्र आत्महत्या के मामले लगातार ज्यादा दर्ज किए गए. NCRB के अनुसार, महाराष्ट्र, यूपी, एमपी और तमिलनाडु मिलकर देश के लगभग 50% छात्र आत्महत्या मामलों का हिस्सा रहे.

छात्रों के सुसाइड की सबसे बड़ी वजहें

रिपोर्ट के मुताबिक, पारिवारिक समस्याएं छात्र आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह रहीं. इसके बाद एग्जाम में फेल होना दूसरा बड़ा कारण बनकर सामने आया. सिर्फ 2024 में ही 2,032 छात्रों ने परीक्षा में असफल होने के कारण आत्महत्या की. यह उस साल दर्ज कुल छात्र आत्महत्या मामलों का करीब 14% था.

25,000 से ज्यादा मौतें एग्जाम में फेल होने से जुड़ीं

NCRB के आंकड़े बताते हैं कि 2014 से 2024 के बीच 25,000 से ज्यादा छात्र परीक्षा में असफलता से जुड़े कारणों के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं. इनमें से बड़ी संख्या 18 साल से कम उम्र के छात्रों की रही और इसके बाद 18 से 30 साल के युवा शामिल रहे.

क्यों बढ़ रही है चिंता

एक्सपर्ट्स का मानना है कि पढ़ाई का बढ़ता दबाव, मेंटल प्रेशर, फैमिली प्रॉब्लम्स, फाइनेंशियल दिक्कतें और फ्यूचर को लेकर टेंशन छात्रों पर गहरा असर डाल रही हैं. कोचिंग हब और बड़े एजुकेशन हब वाले शहरों में भी ऐसे मामले ज्यादा सामने आए हैं.

सरकार ने क्या कदम उठाए

बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2022 में NSPS (National Suicide Prevention Strategy) शुरू की थी. इसका मकसद साल 2030 तक आत्महत्या से होने वाली मौतों में 10% की कमी लाना है. इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय की मनोदर्पण हेल्पलाइन भी छात्रों और उनके परिवारों को मेंटल हेल्प देने के लिए चलाई जा रही है. मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2026 तक 3.32 लाख से ज्यादा कॉल इस हेल्पलाइन पर आ चुकी हैं.

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