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सिमुलतला आवासीय विद्यालय: बिहार की 'टॉपर्स फैक्ट्री' की वो अनसुनी कहानी, जो नेतरहाट से शुरू हुई थी

बिहार बोर्ड 10वीं टॉपर पुष्पांजलि कुमारी के स्कूल सिमुलतला आवासीय विद्यालय की पूरी कहानी. जानें कैसे नेतरहाट के पूर्व छात्रों ने इसे बनाया बिहार की टॉपर्स फैक्ट्री.

सिमुलतला आवासीय विद्यालय: बिहार की 'टॉपर्स फैक्ट्री' की वो अनसुनी कहानी, जो नेतरहाट से शुरू हुई थी
विद्यालय के प्रिंसिपल डॉ राजीव रंजन कहते हैं कि स्कूल को "टॉपर्स की फैक्ट्री" कहना आपत्तिजनक है.

Simultala Awasiya Vidyalaya Jamui : बिहार बोर्ड के दसवीं के परिणाम जारी होने के बाद सिमुलतला स्कूल एक बार फिर से चर्चा में है. रविवार को जारी हुए परिणाम में इसी स्कूल को पुष्पांजलि कुमारी ने पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया. इसके बाद एक बार फिर से इसे टॉपर्स फैक्ट्री कहा जाने लगा. 2015 के बाद से बिहार बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षा के परिणाम में स्कूल का दबदबा रहा है. इसकी वजह से जमुई जिला भी खासा चर्चित हुआ है. लेकिन दिलचस्प यह है कि इस स्कूल के खुलने की कहानी जमुई से 200 किलोमीटर दूर पूर्णिया में शुरू हुई थी. बिहार और झारखंड के बंटवारे के बाद लड़कों के लिए नेतरहाट आवासीय विद्यालय और लड़कियों के लिए इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय हजारीबाग झारखंड का हिस्सा हो गए थे. बिहार में ऐसे किसी स्कूल की जरूरत थी. अलग - अलग समय पर इसकी कोशिश हुई लेकिन सफलता तब मिली जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नेतरहाट स्कूल के पूर्ववर्ती विद्यार्थियों को नेतरहाट की तर्ज पर एक स्कूल शुरू करने के लिए आमंत्रित किया. 

कैसे पड़ा सिमुलतला स्कूल का आधार?

दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 12 अगस्त 2009 को पूर्णिया में विद्या विहार इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे. इस इंस्टीट्यूट के लिए बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने 2006 में जमीन दी थी. नेतरहाट स्कूल के पूर्ववर्ती छात्र रमेश चंद्र मिश्र ने सिर्फ ढाई साल में इस इंस्टीट्यूट की शुरुआत कर दी थी. मुख्यमंत्री इससे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने रमेश चंद्र मिश्र और
नेतरहाट के पूर्व विद्यार्थियों को सिमुलतला स्कूल की परियोजना पर काम करने के लिए आमंत्रित किया. मुख्यमंत्री से मिलने वालों को सीबीआई डायरेक्टर रहे त्रिनाथ मिश्र, रिटायर्ड कर्नल बीबी सिंह, रमेश चंद्र मिश्र, राजेश मिश्र समेत कई लोग शामिल थे. बीबी सिंह बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कहने पर हमने एक प्रेजेंटेशन तैयार किया. हम नेतरहाट से पढ़े थे. हम सिमुलतला स्कूल को उसी तर्ज का बनाना चाहते थे. 

नेतरहाट के दिग्गजों ने तैयार किया था 'ब्लूप्रिंट'

शिक्षकों की चयन प्रक्रिया, सिलेबस से लेकर स्टूडेंट के चयन की प्रक्रिया सब नेतरहाट के पूर्व छात्रों ने तैयार की. नेतरहाट के शिक्षक रहे के एन वासुदेवन ने शिक्षक के लिए आवेदकों का इंटरव्यू किया. इस तरह से विद्यालय की शुरुआत हुई. पहले साल 120 सीट के लिए 38 हजार आवेदन आए थे. इससे पता चलता है कि स्कूल के प्रति कैसा माहौल बना था. बीबी सिंह कहते हैं कि हमने शुरुआत काफी अच्छी कराई थी. हालांकि बाद में वह विद्यालय वैसा चला नहीं, जैसे हम चाहते थे. हम उस स्कूल से इमोशनली जुड़े हुए थे. नेतरहाट ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन के सदस्य वहां पढ़ाने जाते थे लेकिन फीस भी नहीं लेते थे. हम चाहते थे कि इसे CBSE से मान्यता दिलाई जाए न कि बिहार बोर्ड से. लेकिन हमारे कई प्रस्तावों को धीरे - धीरे किनारे कर दिया गया. स्कूल के लिए 50 एकड़ जमीन उपलब्ध होने के बाद भी वहां भवन नहीं बना. इसलिए सिमुलतला नेतरहाट जैसा नहीं बन पाया. अगर हमारे प्रस्ताव पर काम होता तो स्कूल नेतरहाट से बेहतर स्थिति में होता. 

प्रिंसिपल बोले, टॉपर्स फैक्ट्री कहे जाने से आपत्ति..

विद्यालय के प्रिंसिपल डॉ राजीव रंजन कहते हैं कि स्कूल को "टॉपर्स की फैक्ट्री" कहना आपत्तिजनक है. हम यहां विद्यार्थियों का विकास करते हैं कोई प्रॉडक्ट तैयार नहीं करते हैं. इसलिए स्कूल को फैक्ट्री कहना सही नहीं है. कई बार भले ही हमारे स्टूडेंट टॉपर्स की लिस्ट में न आते हों, लेकिन स्कूल का ओवरऑल रिजल्ट हमेशा बेहतर रहता है. बारहवीं की परीक्षा में हमारे 67 विद्यार्थी शामिल हुए थे इनमें सभी को 80% से अधिक नंबर आए. दसवीं की परीक्षा में 104 स्टूडेंट में से 96 स्टूडेंट को 85% से अधिक नंबर मिले, 68 को 90% से अधिक और 10 को 95% से अधिक नंबर मिले. यह बताता है कि हमारा विद्यालय कितना अच्छा कर रहा है. 

2015 से अब तक का दबदबा

बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में सिमुलतला स्कूल का दबदबा रहा है. 2010 में इस विद्यालय की शुरुआत हुई थी. तब सिर्फ छठी क्लास में एडमिशन हुए थे. इन विद्यार्थियों ने 2015 में दसवीं बोर्ड की परीक्षा दी. पहले ही साल सिमुलतला के विद्यार्थियों ने सिमुलतला को टॉपर्स फैक्ट्री बना दिया. उस साल टॉप - 10 में 31 विद्यार्थी शामिल थे. इनमें से 30 सिमुलतला के ही थे. इसके बाद हर साल यह परिणाम रहा. 2019 में भी इसी विद्यालय ने दसवीं का टॉपर दिया. 2020 से 2025 तक रैंक 1 पर विद्यालय की दावेदारी कमजोर हुई. लेकिन 2026 के परिणाम में पुष्पांजलि ने 500 में 492 अंक पाए और राज्य में पहला स्थान हासिल किया.

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