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मवेशी चराते दादा और फैक्ट्री में काम करते पिता, पोती अनुपा ने बिहार बोर्ड में टॉप कर बदल दी परिवार की तकदीर

Bihar Board Reslut 2206 : बक्सर की बेटी अनुपा कुमारी ने बिहार मैट्रिक परीक्षा में 97.6% अंक पाकर राज्य में तीसरा स्थान हासिल किया. जानिए गुजरात में फैक्ट्री वर्कर की बेटी की इस प्रेरणादायक सफलता और डॉक्टर बनने के उनके सपने के बारे में.

मवेशी चराते दादा और फैक्ट्री में काम करते पिता, पोती अनुपा ने बिहार बोर्ड में टॉप कर बदल दी परिवार की तकदीर
अनुपा की इस सफलता पर उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.

Bihar Board 10th Result 2026 : जिले की होनहार बेटी ने अपनी मेधा और कड़ी मेहनत के दम पर पूरे सूबे में बक्सर का नाम रोशन किया है. राजपुर प्रखंड के ककरिया गांव निवासी नित्यानंद यादव और निर्मला देवी की पुत्री अनुपा कुमारी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (मैट्रिक) में 489 अंक (97.6%) लाकर पूरे बिहार में तीसरा स्थान हासिल किया है. वहीं, वह अपने जिले में प्रथम स्थान पर रही हैं. इस शानदार उपलब्धि के बाद न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है.

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सीमित संसाधनों को नहीं बनने दिया बाधा

खरहना उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा अनुपा बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं. आर्थिक रूप से बहुत सक्षम परिवार न होने के बावजूद, उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया.

पिता नित्यानंद सिंह गुजरात के टाइल्स फैक्टरी में बतौर जेनेरेटर ऑपरेटर का काम करते हैं. उन्होंने बताया कि बिहार में रोजगार की कमी के वजह से उन्हें गुजरात जाकर काम करना पड़ता है. वही माता निर्मला देवी गृहिणी है. वह कहती है कि वह बेटी को कम नहीं करने देती ताकि वह सपने देख सके और आगे बढ़ सके.

परिवार में दादा भरत सिंह भी है जो मवेशियों की देखभाल करते हैं मौके पर वो भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि हमने पेट काटकर भी बच्चों की पढ़ाई को तवज्जो दी और लड़के-लड़कियों में कभी भेद नहीं किया. आज नतीजा सबके सामने है. अनुपा ने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी आर्थिक या सामाजिक बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती.

सफलता का श्रेय और परिवार का साथ

चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर आने वाली अनुपा अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, दादा भरत सिंह और अपने गुरुजनों को देती हैं. उनका मानना है कि नियमित पढ़ाई, अनुशासन और परिवार के सही मार्गदर्शन ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है. अनुपा की बड़ी बहन स्नातक द्वितीय वर्ष में हैं, जबकि उनके दो भाई क्रमशः आठवीं और पहली कक्षा में पढ़ते हैं. अनुपा की सफलता से उनके भाई-बहन भी खासे उत्साहित और प्रेरित हैं.

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डॉक्टर बनकर गांव की सेवा करने का लक्ष्य

अनुपा के सपने सिर्फ अच्छे अंकों तक सीमित नहीं हैं. वह बताती हैं कि उनके गांव से अस्पताल काफी दूर है, जिस वजह से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी को देखते हुए अनुपा ने भविष्य में डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय किया है, ताकि वह अपने गांव में ही लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा सकें.

पूरे गांव के लिए बनीं मिसाल

अनुपा की इस सफलता पर उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. स्थानीय लोगों और शुभचिंतकों का कहना है कि एक साधारण परिवार से निकलकर इतनी बड़ी सफलता हासिल करना पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है. अनुपा की यह उपलब्धि उन तमाम छात्र-छात्राओं के लिए एक मिसाल है, जो अभावों में रहकर भी बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं.
 

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सोमू आनंद
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