विज्ञापन

Rajasthan Board Result 2026 : रिजल्ट देखने के बाद री-चेकिंग कराने का है मन? पहले जान लीजिए इसके नुकसान

सबसे पहले यह समझें कि री-चेकिंग का मतलब पूरी कॉपी को दोबारा चेक करना नहीं होता. इसमें केवल अंकों का दोबारा योग (Retotalling) किया जाता है और यह देखा जाता है कि कहीं कोई सवाल बिना चेक किए तो नहीं छूट गया.

Rajasthan Board Result 2026 : रिजल्ट देखने के बाद री-चेकिंग कराने का है मन? पहले जान लीजिए इसके नुकसान
री-चेकिंग का सबसे बड़ा 'साइड इफेक्ट' यह है कि इसमें नंबर बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं.

Board Result Rechecking ke nuksan : राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. बता दें बोर्ड रिजल्ट आने के बाद स्टूडेंट्स के बीच खुशियों और कभी-कभी निराशा का माहौल बन जाता है. क्योंकि कुछ छात्र अपने अंकों से सैटिसफाइड होते हैं, तो कुछ को लगता है कि उन्हें उम्मीद से कम नंबर मिले हैं. ऐसे में फिर री-चेकिंग (Re-checking) या स्क्रूटनी कराने के बारे में सोचने लगते हैं. लेकिन इससे पहले रिचेकिंग नुकसान के बारे में आपके लिए जानना जरूरी है. आइए आगे आर्टिकल में जानते हैं आखिर रिचेकिंग कराने से क्या आपको 5 नुकसान हो सकते हैं.

क्या होती है री-चेकिंग | What Is Rechecking

सबसे पहली बात, री-चेकिंग का मतलब पूरी कॉपी को दोबारा चेक करना नहीं होता, बल्कि इस प्रोसेस में केवल अंकों का दोबारा जोड़ा (Retotalling) जाता है और यह देखा जाता है कि कहीं कोई सवाल बिना चेक किए तो नहीं छूट गया.

री-चेकिंग के 5 बड़े नुकसान

1. नंबर कम होने का खतरा

री-चेकिंग का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसमें नंबर बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं. अगर दोबारा टोटलिंग में कोई गलती पकड़ी गई और आपके अंक कम हो गए, तो वही आपकी मार्कशीट पर दर्ज होंगे. यानी फायदे के चक्कर में नुकसान भी हो सकता है.

2. लंबी है प्रोसेस

यह प्रोसेस इतना आसान नहीं है. आपको रिजल्ट के 10-15 दिनों के भीतर आवेदन करना होता है. इसके बाद बोर्ड की कॉपी देखने के लिए आपको लंबी कागजी कार्यवाही और इंतजार से गुजरना पड़ता है, जो मेंटल स्ट्रेस दे सकता है.

3. रिचेकिंग के लगते हैं पैसे

री-चेकिंग मुफ्त नहीं है. हर सब्जेक्ट के लिए बोर्ड एक निश्चित फीस वसूलता है. अगर आप 3-4 विषयों में री-चेकिंग डालते हैं, तो यह आपकी जेब पर अच्छा-खासा असर डाल सकता है, खासकर तब जब परिणाम में कोई बदलाव न आए.

4. एडमिशन में देरी

जब तक री-चेकिंग का रिजल्ट नहीं आता, तब तक आपकी पुरानी मार्कशीट ही वैलिड होती है. कई बार अगली कक्षा या कॉलेज में एडमिशन की प्रोसेस खत्म हो जाती है और छात्र अधर में लटके रह जाते हैं.

5. कॉन्फिडेंस होता कम

अगर री-चेकिंग के बाद भी नंबर नहीं बढ़ते, तो छात्र के आत्मविश्वास को गहरी चोट पहुंचती है. इससे बेहतर है कि जो परिणाम आया है, उसे स्वीकार कर आगे की तैयारी पर ध्यान दिया जाए.


 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com