कांग्रेस नेता राहुल गांधी 12वीं की कॉपियों की चेकिंग में हुई गड़बड़ियों को लेकर लगातार सरकार और सीबीएसई पर हमला बोल रहे हैं. उन्होंने एक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर सरकार और सीबीएसई पर गंभीर आरोप लगाए हैं. राहुल गांधी का दावा है कि करीब 18.5 लाख छात्रों की भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनकी आंसर शीट को मोबाइल फोन से स्कैन किया गया था.
टेंडर की शर्तों में हुआ चुपचाप बदलावराहुल गांधी के मुताबिक, मई 2025 में जारी सीबीएसई के मूल टेंडर में साफ लिखा था कि कॉपियों को बिना बाइंडिंग नुकसान पहुंचाए 'ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर' से कम से कम 300 DPI रिजोल्यूशन पर स्कैन किया जाएगा. लेकिन अगस्त में दोबारा जारी टेंडर में इन शर्तों को चुपचाप बदल दिया गया. स्कैनर शब्द को सामान्य कर दिया गया और रिजोल्यूशन घटाकर 200 DPI कर दिया गया.
वेंडर को फायदा पहुंचाने का आरोपCBSE's May 2025 tender required answer sheets to be scanned with automatic robotic scanners, spines preserved, at a minimum of 300 DPI.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 31, 2026
The tender re-issued in August quietly removed all of it. “Scanners” became generic. Resolution dropped to 200 DPI.
Now we know what that… https://t.co/XXdorOi3oq
आरोपों के अनुसार, यह बदलाव COEMPT नामक वेंडर को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था, जिसने कॉपियों को मोबाइल से स्कैन किया. इसके चलते धुंधली कॉपियां, गायब पेज और अधूरी स्कैनिंग जैसी बड़ी समस्याएं सामने आईं. राहुल गांधी ने इसे कोई गलती नहीं, बल्कि एक पहले से तय धोखा बताया है, जिससे लाखों बच्चों का गलत मूल्यांकन हुआ.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम के पास आमों पर बात करने का वक्त है, लेकिन इन बच्चों के लिए नहीं. शिक्षा मंत्री अभी भी पद पर बने हुए हैं, और पीएम की चुप्पी इस अपराध में उनकी मिलीभगत का सबूत है.
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