पंजाब सरकार अब निजी स्कूलों में में खुद से टेक्सटबुक्स सप्लाई करने जा रही है. इस साल से पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) PSEB से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 12 तक पढ़ने वाले हर छात्र को सीधे किताबें दी जाएंगी. पंजाब सरकार के इस कदम से अधिकृत एजेंसियों और किताबों की दुकानों का लंबे समय से चला आ रहा एकाधिकार खत्म हो जाएगा. शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने गुरुवार को इस बात पर जोर दिया कि यह फैसला पारदर्शिता बढ़ाने, परिवारों के लिए खर्च कम करने और बिचौलियों पर निर्भर हुए बिना समय पर पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है.
10 लाख से ज़्यादा छात्रों को होगा फायदा
एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "स्कूल इस बात का सख्ती से ध्यान रखेंगे कि बिल पर छपी रियायती कीमत से ज़्यादा कोई भी रकम न ली जाए. वे बिना कोई मुनाफा कमाए, सिर्फ किताबों के वितरण में मदद करेंगे. इससे निजी स्कूलों के 10 लाख से ज़्यादा छात्रों को फायदा होगा."
शिक्षा मंत्री ने बताया कि 15 प्रतिशत की जो छूट पहले किताब बेचने वालों को दी जाती थी, अब उसका सीधा फायदा स्कूलों के जरिए छात्रों को मिलेगा. उम्मीद है कि इस कदम से परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा और साथ ही व्यवस्था में ज़्यादा जवाबदेही आएगी.
इसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताते हुए, मंत्री बैंस ने जानकारी दी कि PSEB ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक खास ई-कॉमर्स पोर्टल बनाया है. छात्र मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए पाठ्यपुस्तकों की मांग कर सकेंगे, जबकि स्कूल कक्षा और विषय के हिसाब से अपनी ज़रूरतें डिजिटल रूप से अपलोड करेंगे. उन्होंने आगे कहा, "हर छात्र को अलग से लॉगिन क्रेडेंशियल (पहचान पत्र) दिए जाएंगे, ताकि ज़रूरत पड़ने पर माता-पिता सीधे ऑर्डर दे सकें."
ऑनलाइन कर सकेंगे भुगतान
PSEB के चेयरमैन अमरपाल सिंह ने बताया कि पोर्टल को एक सुरक्षित ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से जोड़ा गया है, ताकि लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहे. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था खास तौर पर इसलिए बनाई गई है, ताकि ज़्यादा पैसे वसूलने की कोई गुंजाइश न रहे और पूरी प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता बनी रहे. उन्होंने कहा कि मिले हुए ऑर्डर के आधार पर, PSEB के क्षेत्रीय कार्यालय पाठ्यपुस्तकों के बंडल तैयार करेंगे, जिन्हें स्कूल और छात्र समय पर आकर ले जा सकेंगे. स्कूलों को एक लिखित आश्वासन भी देना होगा कि वे तय की गई रियायती कीमत से ज़्यादा कोई भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लेंगे, ताकि नई नीति का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके.
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