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'मार्क्सवादी बन गया है हमारा एजुकेशन सिस्टम', शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने क्यों कही ये बात?

Education Minister Pralhad Joshi: शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सीबीएसई के एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था पर बात की, उन्होंने बताया कि कैसे आज पेरेंट्स अपने बच्चों के नंबरों के पीछे पड़े हैं और बाकी चीजों को इग्नोर कर रहे हैं.

'मार्क्सवादी बन गया है हमारा एजुकेशन सिस्टम', शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने क्यों कही ये बात?
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एजुकेशन सिस्टम को लेकर की बात

'भारत की शिक्षा व्यवस्था और पेरेंट्स मार्क्स-वादी बन गए हैं...' शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के एक इवेंट में ये बात कही. उन्होंने कहा कि सिर्फ नंबर या मार्क्स के पीछे भागने वाली मानसिकता बन चुकी है, इससे पूरा ध्यान सिर्फ अच्छे नंबर लाने पर होता है. इसके साथ ही उन्होंने रट्टा मारने की आदत को छोड़कर एक्सपेरिमेंटल एजुकेशन  अपनाने पर जोर दिया. शिक्षा मंत्री दिल्ली के द्वारका में 'एक्सपीरियंस सेंटर' का उद्घाटन करने पहुंचे थे, जहां उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बातचीत की. 

पेरेंट्स पर हावी हो गई है ये मानसिकता

शिक्षा मंत्री ने इस इवेंट में कहा, "छात्रों का ज्यादातर वक्त चीजें याद करने और ये प्लान करने में निकल जाता है कि ज्यादा से ज्यादा नंबर कैसे लाए जाएं. माता-पिता भी अक्सर यही चाहते हैं कि किसी तरह बच्चे के अच्छे मार्क्स आने चाहिए. मैं अक्सर कहता हूं कि लोग एक अलग ही तरह के 'मार्क्सवादी' बन गए हैं. विचारधारा भले ही दूसरी हो, लेकिन ये मानसिकता लगभग हर माता-पिता पर हावी हो गई है."

बच्चों को होता है नुकसान

शिक्षा मंत्री ने कहा कि नंबरों के पीछे भागने वाली मानसिकता का नुकसान बच्चों को झेलना पड़ता है. उससे बच्चे की असली समझ, उसकी सीखने की क्षमता और उसकी रुचि पीछे छूट जाती है. नंबर लाने का दबाव छात्रों का आत्मविश्वास भी कम कर देता है. जो ज्ञान केवल किताबों में ही सीमित रहे और जरूरत पड़ने पर काम न आए, उसका कोई खास फायदा नहीं होता. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के पीछे यही सोच है. 

किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए शिक्षा

उन्होंने कहा कि रटने की आदत को व्यावहारिक और अनुभव पर आधारित शिक्षा से बदलने की जरूरत है. सबसे जरूरी है कि परेशान रहने वाले पेरेंट्स को भी इस बात से बाहर निकलना होगा कि बच्चे के किसी भी तरह सिर्फ नंबर आने चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसी होनी चाहिए जो छात्रों को कॉन्सेप्ट समझने, अपने ज्ञान का इस्तेमाल करने और वास्तविक जीवन के अनुभवों के जरिए आत्मविश्वास विकसित करने में मदद करे.

इस दौरान शिक्षा मंत्री जोशी ने इनोवेशन को बढ़ावा देने की बात कही और बताया कि देश में अटल टिंकरिंग लैब्स इसके लिए काम कर रही हैं. ऐसी 10 हजार लैब पहले ही काम कर रही हैं और 50 हजार नई लैब बनाने का फैसला लिया गया है. 

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