(NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले की जांच शुरू हो गई. मंगलवार रात CBI की विशेष टीम जयपुर एसओजी मुख्यालय पहुंची, और जांच शुरू कर दी. सूत्रों के हवाले से पता चला है कि गुरुग्राम के एक डॉक्टर से जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल और दिनेश ने 25 से 30 लाख रुपए में NEET का पेपर खरीदा था. दिनेश ने पेपर अपने बेटे को दिया, जो सीकर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था.
4 दिन पहले ही सर्कुलेट हो गया था पेपर
दावा है कि 29 अप्रैल को यही पेपर कई अन्य छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाया गया. 3 मई के परीक्षा थी. जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर पहले डिजिटल माध्यम से भेजा गया, बाद में उसका प्रिंट निकालकर बेचा गया. एजेंसियां अब उन छात्रों और अभिभावकों की पहचान में जुटी हैं, जिन्होंने कथित तौर पर पैसे देकर पेपर खरीदा था. मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग हब सीकर अब जांच सीबीआई के रडार पर है.
व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप में पेपर भेजा गया
जांच में व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर साझा किए जाने की बात सामने आई है. एजेंसियां इन ग्रुप्स के एडमिन और सदस्यों की डिजिटल डिटेल खंगाल रही है. हरियाणा से यश यादव नाम के आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि यश यादव भी छात्रों को पेपर बेचने के नेटवर्क से जुड़ा था.
गेस पेपर के नाम से बेचा गया
किसी को शक ना हो, इसके लिए इसे गेस पेपर का नाम दे दिया गया. उस गेस पेपर में आने वाले सवालों को ही छात्रों से पढ़ने के लिए कहा गया. पेपर बेचने वालों ने सवाल आने की गारंटी भी ली थी.
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