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क्या है ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन'? जानें छात्रों के लिए कैसे एक क्लिक में खुल रहा ज्ञान का खजाना

One Nation One Subscription Scheme: अब महंगे इंटरनेशनल जर्नल्स की दीवार टूट चुकी है, ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन’ स्कीम के जरिए देश के लाखों छात्रों और रिसर्चर्स को फ्री में ज्ञान का खजाना मिल रहा है, जिससे पढ़ाई और रिसर्च दोनों को नई रफ्तार मिली है.

क्या है ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन'? जानें छात्रों के लिए कैसे एक क्लिक में खुल रहा ज्ञान का खजाना
One Nation One Subscription Scheme

One Nation One Subscription Scheme: आज के समय में पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि असली गेम रिसर्च और नई जानकारी का है. लेकिन लंबे समय तक देश के लाखों छात्रों और स्कॉलर्स के सामने एक बड़ी परेशानी ये थी कि जरूरी इंटरनेशनल जर्नल्स तक पहुंच आसान नहीं थी. जानकारी मौजूद होती थी, लेकिन उसे पढ़ने के लिए महंगे सब्सक्रिप्शन की दीवार खड़ी रहती थी. ऐसे में कई स्टूडेंट्स चाहकर भी आगे नहीं बढ़ पाते थे. इसी मुश्किल को आसान बनाने के लिए सरकार ने ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन' स्कीम शुरू की, और अब करीब डेढ़ साल बाद इसके असर साफ नजर आने लगे हैं.

क्या है ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन'

ये एक सरकारी स्कीम है, जिसमें सरकार खुद इंटरनेशनल जर्नल्स का सब्सक्रिप्शन लेती है. इसके बाद सरकारी यूनिवर्सिटी, कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े स्टूडेंट्स, टीचर्स और रिसर्चर्स इन जर्नल्स को बिना किसी फीस के एक्सेस कर सकते हैं. इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल देश के बड़े संस्थानों जैसे IIT मद्रास और IISc बेंगलुरु में सबसे ज्यादा देखा गया है.

पहले क्या थी दिक्कत

पहले हर यूनिवर्सिटी या कॉलेज को अलग-अलग जर्नल्स का सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता था, जो काफी महंगा होता था. कई छोटे शहरों के कॉलेज और कम बजट वाले संस्थान ये खर्च नहीं उठा पाते थे. ऐसे में वहां पढ़ने वाले छात्रों को जरूरी रिसर्च मैटेरियल नहीं मिल पाता था.

अब क्या बदल गया

इस स्कीम के आने के बाद अब अलग-अलग सब्सक्रिप्शन की जरूरत खत्म हो गई है. एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए हजारों इंटरनेशनल जर्नल्स तक पहुंच मिल रही है. यानी अब जानकारी कुछ चुनिंदा संस्थानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़े स्तर पर सभी के लिए उपलब्ध हो गई है. इससे पढ़ाई और रिसर्च दोनों को नया बूस्ट मिला है.

किसे मिला सबसे ज्यादा फायदा

जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच इस प्लेटफॉर्म के जरिए 11 करोड़ से ज्यादा रिसर्च आर्टिकल डाउनलोड किए गए. पहले जहां करीब 8 हजार जर्नल्स तक ही पहुंच थी, अब ये बढ़कर 13 हजार से ज्यादा हो गई है. इसका सीधा फायदा रिसर्चर्स, पीएचडी स्टूडेंट्स और यूनिवर्सिटी के छात्रों को मिला है, जिन्हें अब जानकारी के लिए अलग से पैसे खर्च नहीं करने पड़ते.

सरकार ने 2025 से 2027 तक इस स्कीम के लिए करीब 6 हजार करोड़ रुपये का बजट तय किया है. साफ है कि ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन' अब सिर्फ एक स्कीम नहीं, बल्कि देश में पढ़ाई और रिसर्च को नई दिशा देने वाला बड़ा कदम बन चुका है.

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