NTA Paper Leak Case 2026 : देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET एक बार फिर विवादों के घेरे में है. एक बार फिर पेपर लीक का मामले ने लाखों स्टूडेंट्स के भविष्य को दाव पर लगा दिया है. इस बार मामला सीकर से जुड़ा है, जहां परीक्षा से ठीक पहले एक गेस पेपर स्टूडेंट्स तक पहुंचाने का दावा किया गया है. दावा यहां तक है कि इस गेस पेपर से करीब 125 सवाल असली पेपर से हूबहू मिल रहे हैं. इन खबरों ने एक बार फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है.
सवाल यह है कि जिस पेपर को बचाने के लिए करोड़ों रुपये तकनीक पर खर्च होते हैं, उसे चंद लोग कैसे लीक कर देते हैं? आइए समझते हैं एनटीए अपनी प्रिंटिंग कैसे करता है?
जैमर्स के बीच होती है छपाईएक्सपर्ट द्वारा सवालों के फाइनल होने के बाद, इन्हें हाई-सिक्योरिटी प्रिंटिंग में भेजा जाता है. यहां नो-नेटवर्क जोन होता है. बायोमेट्रिक लॉक, 24/7 सीसीटीवी और जैमर्स के बीच पेपर की छपाई होती है.
सुरक्षा के 'हाई-टेक' इंतजाम
NTA पेपर लीक रोकने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करता है:
यूनिक वॉटरमार्कहर प्रश्नपत्र पर एक विशेष कोडिंग या वॉटरमार्क होता है. अगर कोई फोटो खींचता है, तो तुरंत पता चल जाता है कि वह पेपर किस सेंटर और किस कमरे का है.
GPS ट्रैकर्सपेपर ले जाने वाले वाहनों में GPS लगा होता है. अगर गाड़ी तय रास्ते से एक इंच भी इधर-उधर हुई, तो तुरंत अलार्म बज जाता है.
डिजिटल लॉक्सपेपर के बॉक्स डिजिटल लॉक से बंद होते हैं, जो केवल एक विशेष समय पर और अधिकृत व्यक्ति के ओटीपी (OTP) से ही खुलते हैं.
आखिर सेंध लगती कहां है?इतने कड़े इंतजामों के बाद भी गड़बड़ी की आशंका क्यों? एक्सपर्ट्स का मानना है कि अक्सर 'सिस्टम की मानवीय चूक' भारी पड़ती है. चाहे वह बैंक कस्टडी से पेपर का ट्रांसपोर्टेशन हो या परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों की मिलीभगत तकनीक के साथ-साथ इंसानी ईमानदारी ही सबसे बड़ी कड़ी है.
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