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परीक्षा लेने की क्या जरूरत, ऐसे ही दाखिला दे दो... NEET-PG की कट ऑफ घटाने पर फूट रहा गुस्सा

NEET PG Cut Off: FAIMA यानि फेडरेशन ऑफ इंडिया मेडकल एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन ने भी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध करते कहा कि ज़ीरो परसेंटाइल कट आफ़ का मतलब यह है कि जिसके माइनस में नंबर है उसे भी प्रवेश मिलेगा.ऐसे में वो क्या सर्जरी करेगा और क्या ही इलाज करेगा.

परीक्षा लेने की क्या जरूरत, ऐसे ही दाखिला दे दो... NEET-PG की कट ऑफ घटाने पर फूट रहा गुस्सा
नीट-पीजी: कटऑफ में बदलाव का विरोध
  • NBEMSने तीसरे राउंड की काउंसिलिंग के लिए सभी श्रेणियों के कट-ऑफ अंक घटा दिए हैं, जिसका विरोध हो रहा है
  • SC, ST, OBC उम्मीदवार जो माइनस 40 नंबर प्राप्त कर चुके हैं, वे अब MD,MS की काउंसिलिंग में शामिल हो सकेंगे
  • इस फैसले का विरोध शिक्षाविद केशव कुमार अग्रवाल और FAIMA के संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन ने किया है
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नई दिल्ली:

NEET-PG में एडमिशन को लेकर नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के एक ताजा नोटिफिकेशन पर काफी बवाल हो रहा है, लोग गुस्से में हैं. इसके मुताबिक, सरकार ने तीसरे राउंड की काउंसिलिंग के लिए सभी श्रेणी के कट-ऑफ घटाने का निर्णय लिया है. मतलब ये कि SC, ST, OBC के जिन कैंडिडेट्स को माइनस 40 नंबर मिले हैं, वे लोग भी अब एमडी, एमएस एडमिशन की काउंसिलिंग में शामिल हो पाएंगे. हालांकि एडमिशन की गारंटी की बात नोटिफिकेशन में नहीं दी गई है. इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. 

NBEMS के नोटिफिकेशन का विरोध

नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज के इस नोटिफिकेशन का शिक्षाविद और FAIMA ने भी विरोध किया है. शिक्षा विद केशव कुमार अग्रवाल ने कहा कि 707 नंबर क्वालीफाइंग अंक थे उसे घटाकर अब -40 नंबर पर PG में दाख़िला दिया जाएगाय ये  मेडिकल काउंसिल एग्जामिनेशन बोर्ड की बड़ी ख़ामी है.

उन्होंने कहा कि ऐसे में परीक्षा लेने की क्या जरूरत है. ऐसे ही NEET PG में दाख़िला कर दीजिए. उन्होंने ये भी कहा कि NEET PG में एम्स की सीटें क्यों नहीं ख़ाली जा रही हैं, क्योंकि यहां फ़ैकल्टी आधारभूत ढांचा है. ज़्यादातर उन जगहों पर सीटें ख़ाली हैं, जहां सुविधाओं की कमी है.

FAIMA ने भी किया विरोध  

FAIMA यानि फेडरेशन ऑफ इंडिया मेडकल एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन ने भी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध करते कहा कि ज़ीरो परसेंटाइल कट आफ़ का मतलब यह है कि जिसके माइनस में नंबर है उसे भी प्रवेश मिलेगा यानि -40 नंबर पाने वाला भी अब डॉक्टर बनेगा. ऐसे में वो क्या सर्जरी करेगा और क्या ही इलाज करेगा.  डॉ. रोहन ने कहा कि बहुत सारे प्राइवेट कॉलेज ने बिना आधारभूत ढांचे के सीटें बढ़वा ली हैं. उनको भरने के लिए इस तरह का प्रावधान किया जा रहा है.

कट-ऑफ में क्यों किया गया बदलाव?

NEET-PG 2025 में कट-ऑफ में बदलाव किए थे.  जिसके बाद 18 हजार से ज्यादा PG सीटें भरने का रास्ता साफ हो गया है. देशभर में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कॉलेजों की बड़ी संख्या में खाली पड़ी सीटों को देखते हुए NBEMS ने NEET-PG 2025 के क्वालिफाइंग कट-ऑफ परसेंटाइल में संशोधन किया है. दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में 18,000 से ज्यादा PG सीटें खाली रह गई थीं, जिसके बाद यह फैसला लिया गया. इस कदम का मकसद उपलब्ध सीटों का पूरा इस्तेमाल करना और देश को ज्यादा प्रशिक्षित मेडिकल स्पेशलिस्ट देना है.

रैंकिंग सिस्टम है NEET-PG 

NEET-PG में शामिल सभी उम्मीदवार MBBS पास डॉक्टर हैं, जिन्होंने अपनी डिग्री और इंटर्नशिप पूरी कर ली है. NEET-PG केवल एक रैंकिंग सिस्टम है, जिससे काउंसलिंग के जरिए पारदर्शी और मेरिट के आधार पर सीटों का आवंटन किया जाता है. पहले के ऊंचे कट-ऑफ की वजह से उम्मीदवार कम रह गए थे, जबकि सीटें उपलब्ध थीं.
 

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