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NEET Counselling: कम स्कोर पर भी मिल सकता है सरकारी मेडिकल कॉलेज, जानें क्या होता है स्ट्रे वैकेंसी राउंड?

यह राउंड पहले तीन स्टेप्स के बाद बची हुई खाली सीटों को भरने के लिए आयोजित किया जाता है. क्यूंकि हाई रैंक वाले स्टूडेंट्स पहले ही एडमिशन ले चुके होते हैं, इसलिए इस राउंड में कम स्कोर या कम रैंक वाले कैंडिडेट्स को भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीट मिलने के चांस बढ़ जाते हैं.

NEET Counselling: कम स्कोर पर भी मिल सकता है सरकारी मेडिकल कॉलेज, जानें क्या होता है स्ट्रे वैकेंसी राउंड?
जब पहले तीन राउंड्स के बाद भी कुछ सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रह जाती हैं, तो उन्हें भरने के लिए यह स्पेशल राउंड आयोजित किया जाता है.

NEET 2026 : NEET यूजी का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. इस परीक्षा में शामिल करीब 20 लाख स्टूडेंट्स में से 11.21 लाख छात्रों ने सफलता हासिल की है. बता दें कि इस कठिन परीक्षा को पास करने के बाद हर छात्र का एक ही सपना होता है सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करना. लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेज में कई बार कम स्कोर या कम रैंक आने पर दाखिला पाना मुश्किल होता है. क्योंकि यहां पर पहले हाई रैंक वालों को प्रियोरिटी दी जाती है. अगर आपका स्कोर भी थोड़ा कम रह गया है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है. NEET काउंसलिंग का स्ट्रे वैकेंसी राउंड आपके सपनों को उड़ान दे सकता है. यह राउंड आपके लिए गोल्डन चांस साबित हो सकता है. आइए समझते हैं आखिर यह राउंड क्या है और कैसे यह कम नंबरों पर भी आपको सरकारी कॉलेज की सीट दिला सकता है.

क्या होता है स्ट्रे वैकेंसी राउंड?

नीट की काउंसलिंग तीन स्टेप्स में होती है- राउंड 1, राउंड 2, मॉप-अप राउंड, और सबसे आखिरी में आता है स्ट्रे वैकेंसी राउंड.

जब पहले तीन राउंड्स के बाद भी कुछ सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रह जाती हैं, तो उन्हें भरने के लिए स्ट्रे वैकेंसी राउंड (Stary Vaccancy Round) चलाया  किया जाता है. कई बार ऐसा होता है कि किसी स्टूडेंट को सीट अलॉट तो हो जाती है, लेकिन वह किसी कारण- जैसे डॉक्यूमेंट्स की कमी या दूसरे कॉलेज में एडमिशन लेने के कारण एडमिशन नहीं लेता है. ऐसे में वो सीट खाली रह जाती है.

अब इस रेस में वही छात्र बचते हैं जिनका स्कोर थोड़ा कम था. ऐसे में बचे हुए स्टूडेंट्स में से मेरिट के आधार पर सीट अलॉट कर दी जाती है. यही कारण है कि कई बार स्ट्रे वैकेंसी राउंड का कट-ऑफ उम्मीद से बहुत नीचे चला जाता है और कम रैंक वाले छात्रों का भी सपना अपने मन चाहे कॉलेज में पढ़ने का पूरा हो जाता है.

इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

नया रजिस्ट्रेशन नहीं

ज्यादातर मामलों में इस राउंड में फ्रेश रजिस्ट्रेशन की इजाजत नहीं होती है. जिन्होंने पहले रजिस्ट्रेशन कराया है और उन्हें कोई सीट नहीं मिली, वही इसके लिए एलिजिबल होते हैं.

सीट छोड़ना पड़ेगा भारी

अगर इस राउंड में आपको कोई सीट अलॉट हो जाती है, तो आपको एडमिशन लेना ही होगा. नहीं तो सीट छोड़ने पर पेनाल्टी लग सकती है.

वेबसाइट पर रखें नजर

इस राउंड की अपडेट के लिए मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और अपनी स्टेट ऑथोरिटी की वेबसाइट पर लगातार नजर बनाए रखें.

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