Nandan Nilekani Career and Net Worth: इंफोसिस के को-फाउंडर और देश के जाने-माने टेक्नोलॉजी लीडर नंदन नीलेकणी एक बार फिर चर्चा में हैं. उन्हें एग्जाम रिफॉर्म के लिए बनी हाई-लेवल टास्क फोर्स की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह टास्क फोर्स देश के एग्जामिनेशन सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी, हाई-टेक और फुलप्रूफ बनाने के लिए बनाई गई है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीएम मोदी ने जिस नीलकणी पर इतना बड़ा भरोसा जताया है, उसकी खुद की शुरुआत कैसी थी. किस कंपनी में पहली जॉब की थी और आज उनके पास कितनी दौलत है. आइए जानते हैं नंदन नीलेकणी के शुरुआती सफर, नेटवर्थ और नई जिम्मेदारी के बारे में.
नंदन नीलेकणी ने किस कंपनी से की थी पहली नौकरी
कर्नाटक के एक मिडिल क्लास फैमिली से आने वाले नंदन नीलेकणी ने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद साल 1978 में उन्होंने मुंबई की आईटी कंपनी पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स (Patni Computer Systems) से अपने करियर की शुरुआत की. इसी नौकरी के दौरान उनकी मुलाकात एनआर नारायण मूर्ति से हुई. नौकरी में कुछ साल बिताने के बाद 1981 में नीलकणी ने नारायण मूर्ति और 5 अन्य साथियों के साथ मिलकर अपनी नौकरी छोड़ दी और इन्फोसिस (Infosys) की शुरुआत की, जो आज ग्लोबल आईटी इंडस्ट्री का एक बहुत बड़ा नाम है.
नंदन नीलकणी की नेटवर्थ कितनी है?
फोर्ब्स की रियल-टाइम ट्रैकिंग के अनुसार, नंदन नीलकणी की कुल संपत्ति (Net Worth) करीब 2.4 बिलियन डॉलर (करीब 23,176 करोड़ रुपए) है. वह भारत के सबसे अमीर व्यक्तियों और टेक दिग्गजों की लिस्ट में गिने जाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि नंदन नीलकणी इंफोसिस के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में कोई सैलरी नहीं लेते हैं.
उन्होंने 2017 में कंपनी में वापसी के बाद यह फैसला लिया था कि वे इस पद के लिए सैलरी या भत्ता नहीं लेंगे. उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा कंपनी में उनकी हिस्सेदारी और निवेश से आता है. नंदन नीलेकणी ने साल 2023 में अपने पुराने संस्थान IIT बॉम्बे को रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 3.8 करोड़ डॉलर का दान भी दिया था. इसे संस्थान को मिली सबसे बड़ी व्यक्तिगत मदद में से एक माना जाता है.
नंदन नीलेकणी देश को आधार कार्ड दिया
नंदन नीलेकणी सिर्फ एक बिजनेसमैन नहीं हैं, बल्कि भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ हैं. साल 2009 में सरकार ने उन्हें भारत की पहचान परियोजना की जिम्मेदारी दी थी. आज हम और आप जिस आधार कार्ड (Aadhaar Card) का इस्तेमाल हर जगह करते हैं, उस बड़ा सिस्टम को बनाने का श्रेय नंदन नीलेकणी को ही जाता है. वह UIDAI के पहले अध्यक्ष थे. अब पीएम मोदी ने उन्हें एग्जाम सिस्टम से धांधली खत्म करने का जिम्मा सौंपा है. पीएम मोदी ने अपने वीडियो संदेश में साफ कहा है कि छात्रों के भविष्य से खेलने वाले जेल में हैं और अब तकनीक की मदद से एक ऐसा सिस्टम बनेगा जिसे भेदना नामुमकिन होगा.
नंदन नीलेकणी के साथ इस टीम में कौन-कौन
1. इसरो (ISRO) के पूर्व चीफ एस सोमनाथ, जिनके नेतृत्व में चंद्रयान-3 चांद पर पहुंचा था.
2. इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व डायरेक्टर और राष्ट्रीय सुरक्षा के बड़े एक्सपर्ट तपन कुमार डेका
3. IIT मद्रास के डायरेक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व साइबर सिक्योरिटी के एक्सपर्ट वी कामकोटि
4. पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल, जिन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करने में अहम भूमिका निभाई.
5. केंद्र सरकार के वरिष्ठ IAS अधिकारी और लॉजिस्टिक्स व इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट अमृत लाल मीणा
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