JNU Students Referendum: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन जैसा माहौल है. कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के एक बयान के बाद जेएनयू छात्र संघ लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है. इसी बीच छात्रों ने बड़ा फैसला लेते हुए कुलपति के खिलाफ एक जनमत संग्रह किया, जिसमें सैकड़ों छात्रों ने हिस्सा लिया. इस जनमत संग्रह में छात्रों से पूछा गया कि क्या जातिवादी टिप्पणियों और भ्रष्टाचार को देखते हुए कुलपति को अपने पद पर बने रहना चाहिए. JNUSU का कहना है कि छात्रों की लोकतांत्रिक राय जानने के लिए ऐसा किया गया.
पिछले एक महीने से चल रहा बवाल
पिछले एक महीने से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र लगातार प्रशासन में भ्रष्टाचार और कुलपति की तरफ से की गई जातिवादी टिप्पणियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. कुलपति के बयान के खिलाफ सभी स्कूल फैकल्टी कमेटियों (SFCs), पार्षदों, छात्र संगठनों और छात्रों के सहयोग से JNUSU ने एक लंबा आंदोलन चलाया. जो आंदोलन हड़ताल से शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे विश्वविद्यालय के कई स्कूलों में तालाबंदी तक पहुंच गया. छात्रों ने जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) में लिए गए लोकतांत्रिक फैसलों के जरिए इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया.
कुलपति पर लगाए आरोप
जेएनयू छात्र संघ पदाधिकारों का कहना है कि कुलपति ने अपने ही छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा में एक भी शब्द नहीं कहा. उनकी चुप्पी और पुलिस की सख्ती ने यह साफ कर दिया कि प्रशासन और पुलिस के बीच साठगांठ है. यही वजह है कि अब छात्र संगठन की तरफ से जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया है.
कितने छात्रों ने लिया हिस्सा?
JNUSU पदाधिकारियों ने दावा किया है कि इस रेफरेंडम में 2409 छात्रों ने वोट डाले, जिनमें से 2181 (90.54%) छात्रों ने कुलपति को हटाने के पक्ष में वोट दिया. वहीं सिर्फ 207 (8.59%) छात्रों ने उनके पद पर बने रहने का समर्थन किया, जबकि 21 वोट अवैध पाए गए. छात्र संघ पदाधिकारियों ने कहा कि छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से यह मांग की है कि कुलपति को उनके पद से इस्तीफा देना चाहिए.
अगले हफ्ते होगी जन सुनवाई
जेएनयू छात्र संघ ने ये भी ऐलान किया है कि जेएनयू में अगले हफ्ते कुलपति की जन सुनवाई आयोजित की जाएगी. इसमें रिटायर्ड जजों, वकीलों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बुलाया जाएगा. इस दौरान कुलपति के के खिलाफ एक आरोप पत्र भी जारी करने की बात कही गई है.
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