Iran US War: ईरान में पिछले कुछ दिनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर हमला कर रहे हैं, वहीं ईरान की तरफ से भी कई देशों पर अटैक हो रहा है. इस बीच यहां रहने वाले लोगों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो चुका है. दुनियाभर के कई छात्र भी ईरान में पढ़ने आते हैं, ऐसे में लोगों को चिंता है कि आखिर उनका क्या होगा और उनकी पढ़ाई पर इस युद्ध का कितना असर पड़ेगा. हमने इसी बात का पता लगाया और पता चला कि फिलहाल कुछ हफ्ते तक हायर एजुकेशन के छात्रों पर इस युद्ध का असर नहीं पड़ने वाला है. इसे लेकर हमने कश्मीर के छात्र फैजान से बातचीत की, जो हाल ही में ईरान से लौटे हैं.
ईरान से लौटे 70 छात्र
ईरान से युद्ध के बीच हाल ही में 70 भारतीय छात्र लौटे हैं, जिनमें से ज्यादातर कश्मीर से हैं. जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के ईरान यूनिट कोऑर्डिनेटर फैजान नबी ने एनडीटीवी से खास बातचीत में कई बातों का खुलासा किया. फैजान इन 70 छात्रों में शामिल नहीं थे, क्योंकि वो कुछ ही हफ्ते पहले ईरान से घर लौट गए थे. फिलहाल ईरान से उनका एमबीबीएस का कोर्स चल रहा है.
पढ़ाई पर फिलहाल कोई असर नहीं
फैजान ने एनडीटीवी से बात करते हुए बताया कि फिलहाल ईरान में हायर एजुकेशन के लिए गए छात्रों पर युद्ध का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, खासतौर पर उनकी पढ़ाई पर इसका असर नहीं है. हालांकि बमबारी और युद्ध जैसे हालात का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर जरूर असर पड़ रहा है. ईरान से लौटे कश्मीरी छात्र फैजान ने बताया कि हर साल ईरान में नवरोज (नया साल) की लंबी छुट्टियां पड़ती हैं. ये छुट्टी करीब डेढ़ महीने की होती है, जो फिलहाल चल रही हैं. इस दौरान ईरान की तमाम यूनिवर्सिटीज बंद हो जाती हैं.
कई छात्र पहले से जा चुके थे घर
नवरोज की छुट्टियों में हर साल ईरान में पढ़ने आए छात्र अपने देश लौट जाते हैं, कश्मीर के फैजान भी इनमें ही शामिल थे. हालांकि जिन छात्रों ने वहीं रुकने का फैसला किया, वो युद्ध के चलते फंस गए और अब उन्हें ईरान से निकाला जा रहा है. फिलहाल ईरान के हालात ऐसे नहीं हैं कि वहां शैक्षणिक संस्थानों को दोबारा खोला जाए, नवरोज की छुट्टियां खत्म होने तक अगर युद्धविराम नहीं होता है तो छात्रों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा. कश्मीरी छात्र फैजान का भी कहना है कि उन्हें इसी बात का डर सता रहा है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो उनके करियर का क्या होगा.
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