NEET UG 2026 Paper Leak : देश का सबसे बड़ा मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET UG 2026 फिलहाल काफी सवालों के घेरे में है. दरअसल, 3 मई को हुई परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था. अब यह परीक्षा 21 जून को दोबारा कराई जाएगी. इस पूरे मामले के बाद छात्रों और पैरेंट्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद पेपर लीक कैसे हो जाता है. इसके साथ ही लोग यह भी जानना चाहते हैं कि NEET का पेपर तैयार करने वाले टीचर्स को कैसे चुना जाता है और NTA पेपर को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाता है.
कैसे चुने जाते हैं NEET का पेपर सेट करने वाले टीचर्स?
NEET जैसी नेशनल लेवल की परीक्षा का प्रश्नपत्र (Question Paper) तैयार करने के लिए NTA देशभर से अनुभवी और एक्सपर्ट टीचर्स को चुनती है. इनमें बड़ी यूनिवर्सिटीज, सेंट्रल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स और बड़े कॉलेजों के प्रोफेसर और लेक्चरर शामिल होते हैं. हर सब्जेक्ट जैसे फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉटनी और जूलॉजी के लिए अलग-अलग एक्सपर्ट्स का पैनल बनाया जाता है.
इसके अलावा एक मेन पेपर सेटर भी नियुक्त किया जाता है, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है. इन टीचर्स का सिलेक्शन उनकी सब्जेक्ट नॉलेज, अनुभव और भरोसे के आधार पर किया जाता है ताकि परीक्षा का लेवल और प्राइवेसी दोनों बनाए रखी जा सके.
पेपर लीक रोकने के लिए NTA क्या करता है
NEET के प्रश्नपत्र को सुरक्षित रखने के लिए NTA कई लेवल्स पर सुरक्षा व्यवस्था लागू करता है. एक्सपर्ट्स की ओर से तैयार किए गए प्रश्नों को एक सुरक्षित और प्रतिबंधित क्षेत्र में रखा जाता है. पेपर तैयार करने वाले टीचर्स को सख्त निगरानी में काम करना होता है और उनके काम को हर दिन सील किया जाता है. जिस कमरे में प्रश्नपत्र तैयार होता है, वहां इंटरनेट की सुविधा नहीं होती और कमरे को साउंडप्रूफ बनाया जाता है ताकि किसी भी तरह की जानकारी बाहर न जा सके. इसके अलावा एक ही परीक्षा के कई सेट तैयार किए जाते हैं ताकि आखिरी समय तक किसी को यह पता न चल सके कि कौन सा पेपर इस्तेमाल होगा.
एन्क्रिप्टेड सिस्टम से भेजे जाते हैं प्रश्नपत्र
प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उन्हें एन्क्रिप्टेड डिजिटल फाइलों के रूप में सरकारी प्रिंटिंग प्रेसों तक भेजा जाता है. वहां से पूरी सुरक्षा के साथ पेपर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाते हैं. इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर निगरानी रखी जाती है.
फिर भी क्यों हो जाते हैं पेपर लीक?
हाल के मामलों में यह सामने आया है कि NTA के इंटरनल पैनल से जुड़े कुछ लोगों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण पेपर लीक की घटनाएं हुईं. इसी वजह से अब NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और एग्जाम सिस्टम में बड़े सुधार की मांग तेज हो गई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि तकनीक और निगरानी को और मजबूत बनाकर ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है.
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