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हरियाणा: शिक्षकों के सिलेबस में जोड़े जा रहे खास कोर्स, नए-पुराने सभी गुरु जी को लेनी होगी ये ट्रेनिंग

हरियाणा के स्कूलों में अब पढ़ाई का तरीका बदलने वाला है. सरकार ने फैसला किया है कि चाहे नए बनने वाले टीचर हों या सालों से पढ़ा रहे 'गुरु जी', अब हर किसी को विशेष बच्चों को समझने और उन्हें पढ़ाने की खास ट्रेनिंग लेनी होगी. इसके लिए मास्टर डिग्री और डिप्लोमा लेवल के सिलेबस में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं.

हरियाणा: शिक्षकों के सिलेबस में जोड़े जा रहे खास कोर्स, नए-पुराने सभी गुरु जी को लेनी होगी ये ट्रेनिंग
हरियाणा के टीचर सीखेंगे दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने का हुनर, स्कूलों में शुरू होंगे स्पेशल कोर्स. (सांकेतिक तस्वीर)

Chandigarh News: हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब राज्य में टीचर बनने के लिए की जाने वाली पढ़ाई, यानी B.Ed. और D.El.Ed. के सिलेबस में कुछ खास कोर्स जोड़े जा रहे हैं. शुक्रवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस योजना की समीक्षा की और बताया कि इसका मकसद शिक्षकों को उन बच्चों के लिए तैयार करना है जिन्हें सीखने या समझने में विशेष मदद की जरूरत होती है. सरकार चाहती है कि जब कोई छात्र टीचर बनकर स्कूल निकले, तो उसके पास हर तरह के बच्चे को संभालने का हुनर हो.

नए और पुराने, दोनों शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग जरूरी

यह योजना केवल उन छात्रों के लिए नहीं है जो अभी कॉलेज में हैं. सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी. अनुपमा ने साफ किया है कि स्कूलों में पहले से पढ़ा रहे मौजूदा शिक्षकों को भी इस ट्रेनिंग से गुजरना होगा. इसके लिए राज्य के जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) को जिम्मेदारी दी गई है. इन संस्थानों में शिक्षकों को एक विशेष करिकुलम के जरिए सिखाया जाएगा कि वे बच्चों के भीतर छुपी परेशानियों को शुरुआती स्तर पर ही कैसे पहचानें और उनकी मदद कैसे करें.

ऑटिज्म और लर्निंग डिसेबिलिटी की होगी पहचान

अक्सर स्कूलों में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी या डाउन सिंड्रोम जैसी स्थितियों वाले बच्चों को सामान्य पढ़ाई में दिक्कत आती है. अब इस नई ट्रेनिंग के बाद, हरियाणा के शिक्षक इन स्थितियों को न केवल समझ पाएंगे, बल्कि बच्चों के साथ सही तालमेल बिठाकर उन्हें बेहतर तरीके से पढ़ा सकेंगे. इस पहल के जरिए सरकार का लक्ष्य पुनर्वास क्षेत्र (Rehabilitation Sector) में एक ऐसा मजबूत वर्कफोर्स तैयार करना है, जो समाज के हर बच्चे को क्वालिटी एजुकेशन देने के काबिल हो.

300 छात्रों की शुरू हुई ट्रेनिंग

इस पूरे बदलाव के पीछे हरियाणा सरकार की एक गहरी सोच है कि कोई भी बच्चा, चाहे उसकी शारीरिक या मानसिक स्थिति कैसी भी हो, शिक्षा के मामले में पीछे न रह जाए. फिलहाल राज्य के अलग-अलग संस्थानों में 300 से ज्यादा छात्र इस तरह के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का हिस्सा बन चुके हैं. संस्थानों को मजबूत करके और ट्रेनिंग का दायरा बढ़ाकर हरियाणा अब समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के मामले में देश के सामने एक नई मिसाल पेश करने की तैयारी में है.

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