Handwriting improving tips: बच्चे की हैंडराइटिंग सुधारनी हो तो इसका सबसे अच्छा रास्ता होता है- उनसे सुलेख लिखवाना. जितना ज्यादा वे राइटिंग प्रैक्टिस करेंगे, उतनी ही बेहतर उनकी लिखावट होती जाएगी. लेकिन ये सवाल पेरेंट्स के मन में रहता है कि बच्चे को लिखने की प्रैक्टिस करवानी हो तो पेंसिल से कराएं या पेन से? अगर आप भी ऐसी ही सोच में हैं, तो जानें क्या करना बेहतर है.
शुरुआत पेंसिल से करना बेहतर है
बच्चे नर्सरी से कक्षा 2-3 तक के बीच बेसिक राइटिंग जैसे अक्षर बनाना सीख जाते हैं. इसलिए इस समय में सबसे अच्छा विकल्प होता है बच्चों को पेंसिल से लिखवाना. बच्चों की ग्रिप पेंसिल पर सही बनती है. सही तरीके से पेंसिल होल्ड करने से वे अच्छी राइटिंग बना पाते हैं. इसके अलावा बच्चे जब पेंसिल से लिखते हैं तो वे अपनी गलती सुधार पाते हैं क्योंकि पेंसिल का लिखा मिटाया जा सकता है.
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पेन कब शुरू करना चाहिए
जब बच्चे बेसिक राइटिंग यानी अक्षरों की बनावट, लाइन में लिखना, स्पेसिंग ठीक हो सीख जाते हैं, तब पेन का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं.
सुलेख कराएं तो इन बातों का ध्यान रखें
- बच्चा सही से पेंसिल पकड़े, ये ध्यान रखना बहुत जरूरी है
- कॉपी में लाइन और स्पेसिंग का ध्यान रखें
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- रोजाना 10-15 मिनट की नियमित प्रैक्टिस कराएं
- बच्चे को जल्दबाजी में नहीं, धीरे और साफ लिखने पर जोर दें
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