Study on learning habbits : कॉलेज लेक्चर हो या ऑफिस मीटिंग, हर हाथ में लैपटॉप या टैबलेट नजर आता है. कीबोर्ड पर उंगलियों की गड़गड़ाहट को अक्सर स्मार्ट लर्निंग की निशानी माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तेजी से टाइप किए गए वे नोट्स आपके दिमाग में कितनी जगह बना पा रहे हैं? 2014 में पाम ए. मुलर और डैनियल एम. ओपेनहाइमर द्वारा की गई एक स्टडी ने चौंका दिया है. आइए आगे जानते हैं लैपटॉप या फिर पेन पेपर क्या है लर्निंग के लिए बेस्ट.
टाइपिंग बनाम राइटिंग: क्या कहता है विज्ञान?रिसर्च के अनुसार, लैपटॉप पर नोट्स लेने वाले स्टूडेंट्स अक्सर 'वर्बेटिम ट्रांसक्रिप्शन' (यानी जो सुना उसे ज्यों का त्यों टाइप करना) के जाल में फंस जाते हैं. क्योंकि टाइपिंग की स्पीड लिखने से ज्यादा होती है, इसलिए आप बिना दिमाग लगाए लेक्चर को रिकॉर्ड तो कर लेते हैं, लेकिन उसे समझ नहीं पाते.

इसके उलट, पेन और पेपर से नोट्स लेना एक स्लो प्रोसेस है. यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. जब आप हाथ से लिखते हैं, तो आप सब कुछ नहीं लिख सकते. ऐसे में आपका दिमाग जानकारी को फिल्टर (Filter), Summarize और प्रोसेस Process करने पर मजबूर हो जाता है. इस ब्रेन एक्सरसाइज को 'कॉग्निटिव इंगेजमेंट' कहा जाता है, जो डीप लर्निंग (Depp Learning) को बढ़ावा देता है.
दिमाग के तारों का जुड़ना: EEG स्टडी के खुलासेहाल ही में 'फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी' में प्रकाशित एक स्टडी ने इस प्रैक्टिकल रिसर्च को बायोलॉजिकल एविडेंट भी दे दिए हैं. EEG (Electroencephalogram) स्कैन से पता चला कि हाथ से लिखते समय दिमाद के कई हिस्से एक साथ एक्टिव होते हैं. जो याददाश्त बनाने और नई जानकारी को समझने में मदद करता है. टाइपिंग के दौरान दिमाग की यह एक्टिवनेस बहुत सीमित हो जाती है.

अध्ययन में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब स्टूडेंट्स को विशेष रूप से निर्देश दिया गया कि वे लेक्चर को शब्द-दर-शब्द टाइप न करें. परिणाम फिर भी नहीं बदला. लैपटॉप की प्रकृति ही ऐसी है कि वह हमें 'पैसिव लर्निंग' ओर ले जाता है.
भारत जैसे देश में, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) का स्तर लगातार बढ़ रहा है और सवाल 'रटने' के बजाय 'एनालिसिस' पर आधारित हो रहे हैं, वहां यह समझना जरूरी है कि नोट्स की मात्रा नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता मायने रखती है.
रिसर्च का मतलब यह कतई नहीं है कि हम तकनीक को छोड़ दें. रिसर्चर्स का मानना है कि लैपटॉप रिसर्च और डेटा एक्सेस के लिए बेहतरीन हैं, लेकिन जब बात Deep Understanding की हो, तो पुराना पेन और कागज आज भी बेजोड़ है.

अगली बार जब आप किसी महत्वपूर्ण लेक्चर में बैठें, तो कीबोर्ड की जगह पेन उठाकर देखें. हो सकता है आपकी स्पीड स्लो हो जाए, लेकिन आपके सीखने की रफ़्तार यकीनन बढ़ जाएगी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं