Class 6 maths teaching tips: कक्षा 6 से गणित का स्तर थोड़ा कठिन होता जाता है. अगर इसी क्लास से बच्चों को सही तरीके से मैथ्स ना पढ़ाया जाए तो आगे चलकर उन्हें काफी समस्या आती है क्योंकि बेसिक कांसेप्ट क्लीयर ही नहीं होते हैं. जानें प्राइमरी स्कूलिंग के बाद जब बच्चे कक्षा 6 में पहुंचते हैं तो उन्हें किस तरह से मैथ्स पढ़ाना चाहिए.
बच्चे को इन तरीकों से पढ़ाना शुरू करें गणित
बेसिक कॉन्सेप्ट क्लयीर करें
कई बार बच्चों को बेसिक कॉन्सेप्ट ही क्लीयर नहीं होते हैं. जैसे जोड़, घटाव, गुणा या भाग. इसके कारण जब वे नए टॉपिक पढ़ते हैं तो भी बेसिक की वजह से गलत सवाल लगा देते हैं. अगर बेसिक्स क्लियर होंगे तो कक्षा 6 और उसके आगे की कक्षाओं में पढ़ाए जाने वाले नए चैप्टर्स जैसे Fractions, Decimals, Ratio आसानी से समझ पाएंगे.
मैथ्स पढ़ने का आत्मविश्वास बढ़ाएं
ज्यादातर बच्चों के मन में गणित पढ़ने को लेकर डर बैठा रहता है. इसलिए उन्हें समझाएं कि गणित एक आसान और लॉजिकल विषय है. जब बच्चे पर परिणाम देने का डर नहीं होगा, तभी वह आत्मविश्वास से सब्जेक्ट को पढ़ पाएगा.
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मैथ्स को मजेदार बना दें
मैथ्स को मजेदार बनाने से बच्चे इस सब्जेक्ट को पढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं. इसलिए उन्हें किताबों से तो पढाएं हीं, साथ ही मैथ गेम्स, पजल्स और क्विज का प्रयोग करें. इसके अलावा नंबर गेम्स जैसे खेल खेलने को कहें.
रोजाना प्रैक्टिस की आदत डालें
गणित का नियमित अभ्यास बहुत जरूरी है. रोजाना थोड़ा-थोड़ा अभ्यास करने से बच्चे की सब्जेक्ट पर पकड़ मजबूत होती है और उसका आत्मविश्वास बढ़ता है.
लर्निंग के इन तरीकों का उपयोग करें
बच्चों को केवल किताब के जरिए ही नहीं पढ़ाया जा सकता बल्कि उन्हें चार्ट, डायग्राम, ग्राफ, वीडियोज के जरिए पढ़ाने से वे जल्दी समझते हैं.
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