दिल्ली हाई कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षाओं में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के समान आयु-छूट (age relaxation) संबंधी याचिका खारिज कर दी है. यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया, जिनमें EWS उम्मीदवारों ने समान छूट की मांग की थी.
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है, जिसमें मांग की गई थी केंद्र सरकार के तहत सीधी भर्तियों और नौकरियों में EWS उम्मीदवारों के लिए उम्र में छूट दी जाए. जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने ये फैसला सुनाया.
याचिकाकर्ताओं का तर्क क्या था
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह था कि जब EWS श्रेणी को 10% आरक्षण दिया गया है, तो उन्हें आयु-सीमा और प्रयासों यानी attempts में भी वही छूट मिलनी चाहिए, जो SC/ST/OBC वर्ग को मिलती है. उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उन्हें भी प्रतियोगी परीक्षाओं में अतिरिक्त अवसर मिलना चाहिए, अन्यथा यह समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन होगा.
सरकार ने क्या कहा
केंद्र सरकार ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि EWS और SC/ST/OBC श्रेणियां समान नहीं हैं. SC/ST/OBC वर्ग को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण उन्हें विशेष छूट दी जाती है. दूसरी ओर, EWS केवल आर्थिक आधार पर परिभाषित श्रेणी है, जिसमें सामाजिक पिछड़ापन शामिल नहीं है. इसलिए दोनों वर्गों को समान सुविधाएं देना आवश्यक नहीं है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने कही ये बात
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार के तर्क को स्वीकार करते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया. अदालत ने फैसले में कहा कि आयु में छूट देना या न देना एक नीतिगत निर्णय है. इसे तय करने का अधिकार सरकार के पास है. जब तक कोई नीति स्पष्ट रूप से असंवैधानिक न हो, तब तक न्यायालय उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता.
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