आज के समय में कई बच्चे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन हिंदी लिखने और पढ़ने में उन्हें कठिनाई होती है. खासकर कक्षा 4 तक पहुंचने के बाद भी अगर बच्चा मात्राओं में गलती करता है, शब्द सही नहीं लिख पाता या वाक्य बनाने में परेशानी होती है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है. सही अभ्यास और सही तकनीक अपनाकर कुछ ही महीनों में बच्चे की हिंदी काफी बेहतर हो सकती है. सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे को रटाने के बजाय समझाकर और खेल-खेल में सिखाया जाए.
सबसे पहले स्वर और मात्राओं की अच्छी समझ दें
हिंदी भाषा की नींव स्वर और मात्राएं हैं. बच्चे को पहले यह समझाएं कि हर मात्रा किसी स्वर का संकेत होती है. जब बच्चा यह समझ जाएगा कि कौन-सी मात्रा किस स्वर को दर्शाती है, तब आगे का अभ्यास आसान हो जाएगा.
एक समय में केवल एक मात्रा सिखाएं
अक्सर माता-पिता एक साथ कई मात्राएं सिखाने लगते हैं, जिससे बच्चा भ्रमित हो जाता है. बेहतर होगा कि एक समय में केवल एक मात्रा का अभ्यास कराया जाए. इसके लिए उसे चित्र दिखाएं, फिर उसका नाम बुलवाएं और अंत में लिखवाएं.
रोजाना श्रुतलेख कराएं
श्रुतलेख (Dictation) हिंदी सुधारने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है. रोज 10–15 शब्द बोलकर लिखवाएं. बच्चा जहां गलती करे, उसे डांटने के बजाय सही शब्द दोबारा लिखवाएं.
मात्रा बदलने से अर्थ कैसे बदलता है, यह समझाएं
जब बच्चा समझता है कि मात्रा बदलने से शब्द का अर्थ बदल जाता है, तब वह अधिक सावधानी से लिखता है. इस तरह के अभ्यास से मात्राओं की समझ मजबूत होती है.
पढ़ने की आदत भी जरूरी है
जो बच्चा रोज पढ़ता है, वह जल्दी सही लिखना भी सीख जाता है. रोज 10 मिनट तक बच्चों की कहानियां, कविताएं या छोटी-छोटी हिंदी पुस्तकें पढ़ने दें। पढ़ते समय कठिन शब्दों की मात्राएं पहचानने को कहें.
रोज केवल 20 मिनट का अभ्यास काफी है
अगर रोज नियमित अभ्यास कराया जाए, तो कुछ ही महीनों में अच्छा परिणाम दिखाई देता है. इसके लिए 5 मिनट- हिंदी पढ़ना, 5 मिनट- कॉपी देखकर लिखना, 5 मिनट- श्रुतलेख, 5 मिनट- स्वयं छोटे वाक्य लिखना शामिल हो.
खेल-खेल में सिखाएं
बच्चों को पढ़ाई मजेदार लगे, इसके लिए कुछ आसान गतिविधियां कर सकते हैं, जैसे- मात्रा वाले फ्लैश कार्ड बनाएं. अक्षरों और मात्राओं को जोड़कर नए शब्द बनवाएं, किसी किताब में एक ही मात्रा वाले शब्द ढूंढने का खेल खेलें, सही और गलत शब्द पहचानने का अभ्यास कराएं.
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