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India NEET vs China Gaokao : 25 लाख छात्र बनाम 1.3 करोड़ छात्र, फिर भी चीन में पेपर लीक क्यों नहीं?

India NEET vs China Gaokao : चीन का गाओकाओ दुनिया के सबसे कठिन और बड़े एंट्रेंस एग्जाम्स में गिना जाता है, जिसमें हर साल करीब 1.3 करोड़ स्टूडेंट्स शामिल होते हैं. इसके बावजूद वहां पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी जैसे विवाद बहुत कम सुनाई देते हैं.

India NEET vs China Gaokao : 25 लाख छात्र बनाम 1.3 करोड़ छात्र, फिर भी चीन में पेपर लीक क्यों नहीं?
दोनों देशों की परीक्षाएं करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी हैं, लेकिन परीक्षा कराने और सुरक्षा को लेकर अपनाए गए तरीके काफी अलग दिखाई देते हैं.

India' NEET vs China's Gaokao : हमारे देश में हर साल लाखों स्टूडेंट्स डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट (NEET) का कॉम्पिटिटिव एग्जाम देते हैं. लेकिन इस एग्जाम में हर साल किसी न किसी तरह का विवाद देखने को मिल जाता है. कभी पेपर लीक के आरोप लगते हैं तो कभी एग्जाम सेंटर और रिजल्ट को लेकर सवाल उठते हैं. सवाल ये है कि देश के इतनी बड़ी और अहम परीक्षा में ये गड़बड़ी या लापरवाही कैसे हो जाती है. नीट की परीक्षा में हर साल 20 से 25 लाख स्टूडेंट्स शामिल होते हैं.  ऐसे में भारत की सबसे अहम परीक्षाओं में से एक नीट एंट्रेंस की तुलना चीन के गाओकाओ एग्जाम (Gaokao Exam) से करें तो वहां हर साल करीब 1.3 करोड़ छात्र परीक्षा देते हैं. इसके बावजूद चीन में पेपर लीक या परीक्षा गड़बड़ी जैसे विवाद बेहद कम सुनाई देते हैं. यही वजह है कि गाओकाओ और भारत की परीक्षा व्यवस्था की तुलना अक्सर चर्चा का विषय बन जाती है.

क्या है गाओकाओ परीक्षा? 

गाओकाओ चीन का नेशनल कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम है. इसे वहां यूनिवर्सिटी में एडमिशन का सबसे बड़ा आधार माना जाता है. यह परीक्षा साल में सिर्फ एक बार होती है और कई छात्रों के लिए इसे भविष्य तय करने वाला एग्जाम माना जाता है. यहां गाओकाओ का स्कोर तय करता है कि छात्र को कौन सी यूनिवर्सिटी और कौन सा कोर्स मिलेगा.

NEET केवल मेडिकल के लिए 

भारत में NEET केवल मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए होता है, जबकि गाओकाओ सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि लगभग सभी बड़े कॉलेज और यूनिवर्सिटी कोर्सेज के लिए एंट्रेंस टेस्ट होता है. यानी चीन में एक ही परीक्षा लाखों छात्रों के पूरे हायर एज्युकेशन एडमिशन सिस्टम का आधार होती है.

चीन में पेपर लीक विवाद कम क्यों सुनाई देते हैं? 

एक बड़ा कारण वहां का बेहद सख्त सिस्टम माना जाता है. गाओकाओ परीक्षा के दौरान कई इलाकों में ड्रोन मॉनिटरिंग, AI सर्विलांस, बायोमेट्रिक जांच और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल ब्लॉकर्स तक का इस्तेमाल किया जाता है. एग्जाम सेंटर्स के आसपास शोर तक कंट्रोल किया जाता है ताकि छात्र बिना किसी परेशानी के एग्जाम दे सकें. दरअसल, चीन में गाओकाओ को सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि एजुकेशन के जरिए जीवन बदलने वाला मौका माना जाता है. कई परिवार सालों तक बच्चों को इस परीक्षा की तैयारी करवाते हैं. एग्जाम के दिनों में कुछ शहरों में ट्रैफिक तक कंट्रोल किया जाता है ताकि छात्र समय पर सेंटर पहुंच सकें.

भारत और चीन के सिस्टम में क्या है अंतर

भारत में NEET और दूसरी बड़ी परीक्षाओं का जिम्मा NTA जैसी एजेंसियों पर होता है, जबकि चीन में परीक्षा सिस्टम काफी सेंट्र्लाइज्ड है. यहां परीक्षा की मॉनिटरिंग बेहद सख्त के साथ-साथ हाईटेक है. हालांकि ये भी सच है कि दोनों देशों की आबादी, शिक्षा व्यवस्था और एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर अलग हैं, इसलिए सीधी तुलना हमेशा आसान नहीं मानी जाती.

दोनों देशों की परीक्षाएं करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी हैं, लेकिन परीक्षा कराने और सुरक्षा को लेकर अपनाए गए तरीके काफी अलग दिखाई देते हैं. यही वजह है कि गाओकाओ और NEET जैसी परीक्षाओं की तुलना अक्सर सोशल मीडिया से लेकर एजुकेशन डिबेट तक में चर्चा का विषय बनी रहती है.

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